बैतूल में स्थिति भयावह : ना बैड, ना आक्सीजन..ना इंजेक्शन

बैतूल में स्थिति भयावह : ना बैड, ना आक्सीजन..ना इंजेक्शन
बैतूल में कोरोना के चलते स्थिति भयावह होती जा रही है हालत यह है ना अस्पतालों में बेड है ना ही आक्सीजन है और ना ही रेमेडेसियर इंजेक्शन है। उधर बेतूल में कोरोना मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है पहले जहां आधा सैकड़ा के करीब मरीज आ रहे थे वही अब लाकडाउन लगते 3 गुना बढ़कर ये आंकड़ा डेढ़ सौ से पौने 2 सौ के बीच पहुंचने लगा है।
महाराष्ट्र से सटे बैतूल जिले में कोरोना वायरस का नया अवतार कोहराम मचा रहा है। शहर के साथ शहरी इलाकों से सटे गांवों में भी ये वायरस महामारी फैला रहा है।
यदि बात करें इसके इलाज की तो अभी तक कोई कारगर इलाज आया नहीं है लेकिन सांस लेने में परेशानी आने पर लोग अस्पताल की ओर भाग रहे हैं।
अब यदि अस्पतालों की बात करें तो बैतूल जिला मुख्यालय पर एक बडा सरकारी अस्पताल है और करीब एक दर्जन मध्यम व लघु श्रेणी के अस्पताल हैं। इसके अलावा मिशनरी का एक बडा अस्पताल पाढर अस्पताल है।
लेकिन इन सभी अस्पतालों के सभी बैड पूरी तरह भर चुके हैं। सभी अस्पतालों ने अब मरीज लेने से इंकार कर दिया है।
आमला विधायक और प्रसिध्द डाक्टर योगेश पंडागरे ने स्वीकारा कि उनके संजीवनी अस्पताल समेत सभी अस्पताल भर चुके हैं। उधर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ अशोक बारंगा ने भी कहा कि उनके अस्पताल में अब बैड नहीं है।
आक्सीजन के संबंध में भी सिविल सर्जन ने स्वीकारा कि सप्लाई में दिक्कत होने पर उन्होने रातोंरात हवा से आक्सीजन बनाने वाली मशीन करीब 50 बुला ली हैं। इससे आक्सीजन की समस्या काफी हद तक ठीक हो जाएगी। लेकिन अन्य निजी अस्पताल में आक्सीजन सप्लाई शून्य तक पहुंच रही है। हालाकि कलेक्टर अमनबीर सिंह ने युध्दस्तर पर प्रयास कर आक्सीजन सिलेंडर के इंतजाम रातोंरात किए हैं।
जहां तक बात रेमेडेसियर इंजेक्शन की है तो उसका भी स्टाक बैतूल में शून्य था। दुकानों में है नहीं और डाक्टर मरीज के परिजन से मांग कर रहे हैं। बडे दवा व्यापारियों के करोडो रूपए एडवांस कंपनियों के पास जमा है लेकिन स्टाक आ ही नहीं रहा। कल एक दुकान में गिनती के आए इंजेक्शन मिनटों में खत्म हो गए। जबकि इंजेक्शन के साथ डाक्टर की पर्ची और आधार कार्ड जरूरी है।
इसी तरह कल बुधवार को आमला विधायक डा योगेश पंडागरे ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सांरग से बात कर इंजेक्शन बुलवाए लेकिन मात्र एक दर्जन आए जो आधा दर्जन को ही दो-दो नसीब हुए।
बैतूल में यदि लोग अब भी नहीं संभले तो स्थिति अति भयावह होने वाली है। हर गली मुहल्ले में न सिर्फ कोरोना संक्रमित हैं बल्कि अपने आसपास मौतों को भी लोग देख रहे हैं।
दुखद यह भी है कि बैतूल में कोई मजबूत राजनैतिक नेतृत्व भी नहीं है जो सबको साथ लेकर चले और लोगों को अपनी जिंदगी में पहले न दिखे इस भयावह संकट से उबार सके।
