स्वास्थ्य के नाम पर बड़ा धोखा! लखनऊ समेत कई जिलों में 20 करोड़ की नकली दवाओं की खेप पकड़ी गई

लखनऊउत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई से नकली दवा कारोबारियों के काले साम्राज्य का एक के बाद एक बड़ा भंडाफोड़ हो रहा है। राज्य में फल-फूल रहा यह नकली दवाओं का अवैध कारोबार न केवल सीधे तौर पर बीमार और मासूम मरीजों की जिंदगी के साथ घिनौना खिलवाड़ कर रहा है, बल्कि कुछ लालची मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए रातों-रात बेहिसाब मोटी कमाई करने का सबसे आसान जरिया भी बनता जा रहा है। आधिकारिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जहां वैध और नामचीन कंपनियां फुटकर दवा विक्रेताओं को अधिकतम 15 से 20 प्रतिशत तक का ही मुनाफा देती हैं, वहीं इन नकली और जहर समान दवाओं के कारोबार में दुकानदारों को सीधे तौर पर 10 गुना तक भारी मुनाफा मिल रहा है।

प्रिंट रेट 380 रुपये वाली 'टेल्मा एच' और 980 रुपये वाली दवा सिर्फ 25 से 100 रुपये में उपलब्ध

एफएसडीए की शुरुआती जांच में सामने आए मामलों के दो बड़े उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • केस – 1: ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) को नियंत्रित करने के लिए बेहद जरूरी मानी जाने वाली लोकप्रिय दवा 'टेल्मा एच' की नकली खेप भी जांच के दौरान पकड़ी गई। पड़ताल में पता चला कि यह खतरनाक नकली दवा खुदरा कारोबारियों को महज 25 से 30 रुपये प्रति पत्ता की दर से थमाई जा रही है, जबकि इस पर मूल प्रिंटेड मूल्य (MRP) 380 रुपये प्रति पत्ता दर्ज है। इसके विपरीत, यदि कोई दुकानदार पक्के बिल पर असली दवा खरीदता है, तो उसे वही पत्ता 300 से 310 रुपये में पड़ता है।

  • केस – 2: बवासीर (पाइल्स) के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 'सिटकॉम' नामक दवा का प्रति पत्ता प्रिंट मूल्य 980 रुपये है, लेकिन यही नकली दवा मेडिकल स्टोर्स पर मात्र 100 रुपये प्रति पत्ता के हिसाब से पहुंचाई जा रही थी। इसी तरह विभिन्न प्रकार के कफ सिरप और अन्य जीवनरक्षक दवाएं भी उनके वास्तविक प्रिंट मूल्य से लगभग 10 गुना कम बेहद कोड़ियों के दाम पर स्टोरों तक सप्लाई की जा रही हैं।

बिना अग्रिम भुगतान के उधार मिलती हैं नकली दवाएं, इसलिए लालच में फंस रहे हैं दुकानदार

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि नकली दवाएं बेचने वाले इन शातिर अपराधियों का नेटवर्क किस तरह काम करता है। हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे पड़ोसी राज्यों से आ रही इन नकली दवाओं के मामले में किसी अधिकृत डिपो की संलिप्तता नहीं होती है। ये नकली दवाएं सीधे अवैध निर्माण स्थलों से नामचीन और प्रतिष्ठित कंपनियों के हूबहू नकली रैपर में पैक होकर विभिन्न शहरों के गुप्त गोदामों तक पहुंचाई जाती हैं।

वहां से इन्हें छोटी-छोटी तहसीलों और स्थानीय बाजारों के मेडिकल स्टोर्स तक भेजा जाता है। वैध तरीके से असली दवा खरीदने पर दुकानदारों को जहां पक्का बिल लेना पड़ता है और उसकी कीमत का भुगतान तुरंत नकद करना होता है, वहीं इसके उलट नकली दवाएं दुकानदारों को बिना एक भी रुपया चुकाए पूरी तरह उधार मिल जाती हैं। मेडिकल स्टोर संचालक इन घटिया दवाओं को ग्राहकों को बेचने के बाद, अगले महीने जब नया एजेंट खेप लेकर आता है, तब उसे भुगतान करते हैं। इसी बड़े वित्तीय आकर्षण और बिना पैसे लगाए मोटा मुनाफा कमाने के लालच में आकर खुदरा दवा कारोबारी अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को भूलकर धड़ल्ले से नकली दवाएं बेच रहे हैं।

दवाओं में जीवनरक्षक केमिकल गायब, खड़िया मिट्टी और चूने से तैयार हो रही हैं नकली गोलियां

एफएसडीए की टीम ने हाल ही में आगरा, लखनऊ, गोंडा, लखीमपुर खीरी, महराजगंज और गोरखपुर समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में छापेमारी कर लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य की भारी मात्रा में नकली दवाएं जब्त की हैं। अलग-अलग स्थानों पर पकड़े गए संदिग्धों से की गई पूछताछ के बाद इस पूरे संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क और उनकी मुनाफाखोरी की रणनीति का पर्दाफाश हुआ है।

विशेषज्ञ सूत्रों का कहना है कि जब इन पकड़ी गई नकली दवाओं की प्रयोगशाला (लैब) में जांच कराई गई, तो उसमें नाममात्र का भी असली केमिकल या सॉल्ट नहीं मिला। इन नकली टैबलेट्स को तैयार करने में सिर्फ खड़िया मिट्टी और सफेद चूने का इस्तेमाल कर उन्हें हूबहू असली गोली का स्वरूप दे दिया गया था। यही वजह है कि बाजार में बिकने वाली ये नकली दवाइयां मरीजों के मर्ज पर पूरी तरह बेअसर साबित हो रही हैं और मरीज की जान पर बन आती है।

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की दो टूक— नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए हर जिले में सघन जांच जारी

इस पूरे गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राज्यभर में नकली दवाओं के इस खतरनाक नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए प्रत्येक जिले में विशेष टीमों द्वारा लगातार सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश के सभी दवा व्यापारियों और दुकानदारों से कड़ी अपील की है कि वे बिना वैध और पक्के बिल के न तो कभी कोई दवा खरीदें और न ही अपने काउंटर से बेचें। आयुक्त ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी भी मेडिकल स्टोर की जांच के दौरान बिना पक्के बिल या संदिग्ध स्टॉक की दवाएं बरामद होती हैं, तो संबंधित संचालक के खिलाफ बिना किसी नरमी के अत्यंत सख्त कानूनी और विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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