इस बार पुत्रदा एकादशी पर बन रहा खास संयोग, शिव-विष्णु की पूजा से पूरी होगी संतान से जुड़ी हर मनोकामना

सावन अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है और इस पवित्र महीने के कुछ ही दिन शेष बचे हैं. लेकिन सावन के आखिरी दिनों में पड़ने वाली एकादशी इस बार बेहद खास मानी जा रही है. सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. खास बात यह है कि सावन का महीना होने के कारण इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसे में इस बार की पुत्रदा एकादशी भक्तों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत में बताया कि सावन माह की अंतिम एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस बार यह व्रत 30 अगस्त को रखा जाएगा. ज्योतिषाचार्य के मुताबिक रविवार के दिन पुत्रदा एकादशी का पड़ना भी एक विशेष संयोग माना जा रहा है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. वहीं सावन का महीना होने के कारण भगवान शिव की पूजा का भी अपना अलग महत्व है. यही वजह है कि इस दिन शिव और विष्णु दोनों की आराधना करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है.
संतान इच्छुक दंपति जरूर रखें व्रत
पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत खासतौर पर संतान की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. संतान इच्छुक दंपत्ति इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत रखकर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं. मान्यता है कि इससे संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों की मनोकामना पूरी हो सकती है और संतान पर भगवान की कृपा बनी रहती है. हालांकि धार्मिक मान्यताओं को आस्था के रूप में ही देखना चाहिए. इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव का स्मरण, दीप जलाना, पूजा-पाठ और जरूरतमंद लोगों को दान करना भी शुभ माना जाता है.

पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 की रात 2 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी. भगवान विष्णु की पूजा के लिए 23 अगस्त को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय बताया गया है. वहीं व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 16 मिनट के बीच किया जा सकेगा. ऐसे में श्रद्धालु तिथि और पारण के समय का ध्यान रखते हुए पूजा-पाठ और व्रत की तैयारी कर सकते हैं.

भगवान शिव और भगवान विष्णु का मिलेगा आशीर्वाद
सावन की इस आखिरी एकादशी को लेकर भक्तों में खास उत्साह है. एक तरफ सावन में भगवान शिव की आराधना का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. यही कारण है कि इस दिन शिव और विष्णु की संयुक्त आराधना को लेकर धार्मिक आस्था और भी बढ़ जाती है. अगर आप भी इस दिन व्रत रखने जा रहे हैं तो पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा करें और अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखें.

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