भू-विस्थापित वाहन चालकों से 1 लाख सुरक्षानिधि मांगने का आरोप

कोरबा कोरबा-एसईसीएल मानिकपुर खदान में कार्यरत एक निजी ठेका कंपनी पर भू-विस्थापित वाहन चालकों पर शोषण और श्रम कानूनों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं।
आरोप है कि कंपनी स्थानीय भू-विस्थापित वाहन चालकों से एक गलत एग्रीमेंट करा रही है। समिति के अनुसार, पहला आरोप अवैध सुरक्षा निधि की मांग का है।
आरोप लगाते हुए जानकारी दी जा रही हैं की प्रत्येक भू-विस्थापित वाहन चालकों से काम पर रखने के बदले 1,00,000 रुपए सुरक्षानिधि जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। कंपनी के 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर जारी आदेश में भी लिखा है कि एचपीसी रेट पाने के लिए 1 लाख की सुरक्षानिधि जमा करनी होगी। समिति ने इसे गलत वसूली और शोषण बताया है।
* वाहन चालकों का लाइसेंस रखने और वेतन काटने का आरोप
आरोप हैं की कंपनी के वाहन चालकों का ओरिजिनल ड्राइविंग लाइसेंस अपने पास बंधक के रूप में रख रही है। यह मोटर व्हीकल एक्ट और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है। गाड़ी में सामान्य टूट-फूट या नुकसान होने पर बिना निष्पक्ष जांच के सीधे जमा राशि से कटौती की धमकी दी जा रही है। स्टाम्प में लिखा है कि अगर टाटा कंपनी यह तय करती है कि खराबी वाहन चालक की लापरवाही से हुई है, तो राशि सुरक्षानिधि से काट ली जाएगी। वाहन चालकों को 4 से 5 लोड पर सिर्फ 12 लीटर और 5 से 6 लोड पर सिर्फ 14 लीटर डीजल दिया जा रहा है। ज्यादा डीजल लगने पर उसकी कीमत वेतन से काटने की बात कही गई है। कोल इंडिया और एसईसीएल के नियमों के बावजूद स्थानीय वाहन चालकों को हाई पावर कमेटी वेज रेट नहीं दिया जा रहा है।
* अनुबंध वापस नहीं हुआ तो काम बंद करने की चेतावनी
संगठन की मांग है कि कंपनी गलत अनुबंध को तुरंत वापस ले। साथ ही, सभी वाहन चालकों को एचपीसी वेज रेट और श्रम नियमों के हिसाब से सुविधाएं दे। लाइसेंस और सुरक्षानिधि से जुड़ी गलत शर्तें खत्म करे।
समिति ने चेतावनी दी है कि अगर 5 दिनों में अनुबंध वापस नहीं लिया गया और एचपीसी रेट की लिखित घोषणा नहीं हुई, तो मानिकपुर खदान के भीतर कंपनी का काम पूरी तरह बंद कराकर अनिश्चितकालीन हड़ताल और आंदोलन किया जाएगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और निजी ठेका कंपनी की होगी।
