सूखे की मार के बीच बच्चों के भोजन पर संकट, अपनी जेब से खर्च कर रहे शिक्षक

मुंबई। महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों में चलाई जा रही मिड-डे मील योजना इन दिनों एक गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक संकट के दौर से गुजर रही है। राज्य के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में फैले भीषण सूखे जैसे हालातों के बीच पिछले चार महीनों से इस महत्वपूर्ण योजना का बजट और फंड रुका हुआ है।
फंड अटकने से शिक्षकों की बढ़ी मुश्किलें
परिस्थितियां इतनी विकट हो गईं हैं कि स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को छोटे-छोटे बच्चों की भूख मिटाने और इस योजना को किसी तरह चालू रखने के लिए अपनी खुद की जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
क्यों अटका है मिड-डे मील का बजट?
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय योजनाओं में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए लाई गई सिंगल नोडल एजेंसी (SNA) प्रणाली, जिसे 'स्पर्श' नाम दिया गया है, उसे अपनाने में देरी हुई है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार के फंड को इस नए सॉफ्टवेयर के साथ मिलाने में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, जिसकी वजह से पिछले चार महीनों से लगातार बजट अटका हुआ है।
