अमित शाह ने लॉन्च किया ‘हेल्थ पासपोर्ट’, बच्चों की सेहत का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड

गांधीनगर। देश में 'स्वस्थ बचपन' के जरिए 'स्वस्थ भारत' की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बच्चों और किशोरों की स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं को अधिक आधुनिक, सुदृढ़ और परिवार के अनुकूल बनाने के लिए गुजरात सरकार एक अनूठी पहल लेकर आई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य में बच्चों के लिए 'हेल्थ पासपोर्ट' की अवधारणा को धरातल पर उतारा गया है, जो आने वाले समय में बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।

क्या है अनूठा हेल्थ पासपोर्ट और इसका उद्देश्य

स्कूल हेल्थ – राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू की गई इस योजना में राज्य के जन्म से लेकर 18 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बच्चे को एक विशेष हेल्थ पासपोर्ट प्रदान किया जाएगा। यह पारंपरिक हेल्थ कार्ड से बिल्कुल अलग और उन्नत होगा। इसके माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य की पूरी निगरानी की जाएगी, ताकि उनके विकास में आने वाली किसी भी शारीरिक या मानसिक रुकावट को समय रहते पहचान कर दूर किया जा सके।

जन्म से किशोरावस्था तक की स्वास्थ्य यात्रा का लेखा-जोखा

यह डिजिटल और भौतिक पासपोर्ट सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चे के जन्म से लेकर उसकी किशोरावस्था तक की पूरी स्वास्थ्य यात्रा का एक प्रामाणिक रिकॉर्ड होगा। इसमें बच्चे की हर छोटी-बड़ी बीमारी, टीकाकरण, पोषण स्तर और समय-समय पर होने वाले मेडिकल चेकअप की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। इससे डॉक्टरों को किसी भी बच्चे के इलाज के दौरान उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री को आसानी से समझने में मदद मिलेगी।

विकसित और स्वस्थ भारत के विजन को मिलेगी रफ्तार

इस राज्यव्यापी महत्वपूर्ण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में की गई है। इस दूरदर्शी कदम का मुख्य लक्ष्य बच्चों को शुरुआत से ही एक सुरक्षित और स्वस्थ माहौल देना है, जिससे 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए आने वाली पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।

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