आर्मी चीफ का सैन्य अधिकारियों को बड़ा निर्देश, ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के लिए रहें तैयार

नई दिल्ली। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने अपने पहले आधिकारिक संदेश के माध्यम से सेना के अधिकारियों को नई चुनौतियों और भविष्य की युद्ध नीतियों के प्रति सचेत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' और 'ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2.0' जैसी जटिल परिस्थितियों के लिए सेना का सदैव तैयार रहना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सेना प्रमुख ने सभी यूनिटों को निर्देश दिया है कि वे अपने हथियारों, गोला-बारूद, रसद और सैनिकों की तैयारियों का नियमित रूप से आकलन करें ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
तकनीकी बदलाव और भविष्य का युद्ध
जनरल सेठ ने अधिकारियों को बदलते युद्ध कौशल के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि भविष्य के युद्धों में इंसानों के साथ-साथ ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को सैन्य संचालन का अनिवार्य हिस्सा बताया। सेना प्रमुख ने जोर दिया कि अधिकारी नई तकनीक को अपनाएं और अपने स्तर पर व्यावहारिक समाधान खोजें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई तकनीकों के समन्वय के साथ-साथ बुनियादी सैन्य रणनीतियों और पारंपरिक क्षमताओं का महत्व भी बरकरार रखना आवश्यक है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता
पत्र के माध्यम से सेना प्रमुख ने अधिकारियों को स्वयं उदाहरण बनकर नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल ऊपरी निर्देशों की प्रतीक्षा न करें, बल्कि समस्याओं का स्वयं समाधान निकालें। उन्होंने सैनिकों के साथ भरोसे और सम्मान के रिश्ते को मजबूत करने की सलाह दी। साथ ही, जनरल सेठ ने कहा कि अधिकारियों को शारीरिक रूप से फिट रहना चाहिए और एक ऐसा वातावरण विकसित करना चाहिए जहाँ जूनियर सैनिक नई चीजें सीख सकें और नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा सके।
सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग
सेना प्रमुख ने सोशल मीडिया को एक आधुनिक युद्धक्षेत्र करार देते हुए अधिकारियों को इसके प्रति बेहद सतर्क रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि विरोधी देश दुष्प्रचार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं, इसलिए सेना के हर सदस्य को सोशल मीडिया पर पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही न केवल व्यक्तिगत बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना की प्रतिष्ठा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। अंत में, उन्होंने 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में सेना की अहम भूमिका पर जोर देते हुए अधिकारियों को निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया।
