पंच गौरव योजना में चयनित हुआ बाजरे का चूरमा, जिले को मिलेगी नई पहचान

सीकर। राजस्थान के सीकर जिले का पारंपरिक व्यंजन बाजरे का चूरमा अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाएगा। केंद्र सरकार के 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन ने सीकर की समृद्ध खानपान परंपरा का प्रतिनिधित्व करने के लिए बाजरे के चूरमे को प्रमुख व्यंजन के रूप में चुना है। इस पहल के माध्यम से सरकार सीकर के चूरमे का प्रचार-प्रसार करेगी, जिससे स्थानीय व्यंजनों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
इतिहास, युद्ध और संस्कृति से जुड़ा है बाजरे का चूरमा
सीकर में बाजरे के चूरमे के चयन के पीछे ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक कारण रहे हैं। प्राचीन समय में युद्ध पर जाते समय यहां के राजा-महाराजा बाजरे को घी में भूनकर गुड़ मिलाकर चूरमा साथ ले जाते थे, क्योंकि यह लंबे समय तक खराब नहीं होता था। इसके अलावा, क्षेत्र में पानी की कमी के कारण गेहूं की तुलना में बाजरे का उत्पादन अधिक होता था। देवी-देवताओं के भोग और तीज-त्योहारों पर भी चूरमा बनाने की प्राचीन परंपरा रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए इसे जिले का मुख्य व्यंजन चुना गया है।
'वोकल फॉर लोकल' के तहत पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा
केंद्र सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान के तहत देश के प्रत्येक जिले की समृद्ध विरासत को पहचान दिलाने के उद्देश्य से विशिष्ट पकवानों का चयन किया जा रहा है। उद्योग व वाणिज्य विभाग तथा पर्यटन विभाग के समन्वय से ऐतिहासिक महत्व वाले व्यंजनों को इस सूची में शामिल किया जा रहा है, ताकि शेखावाटी आने वाले पर्यटकों को यहां के प्रामाणिक स्वाद से जोड़ा जा सके।
पंच गौरव योजना में सीकर की अन्य उपलब्धियां
इससे पहले सरकार की 'पंच गौरव' योजना के अंतर्गत सीकर जिले से विभिन्न क्षेत्रों का चयन किया जा चुका है:
एक जिला–एक उपज: प्याज
एक जिला–एक प्रजाति: अरडू
एक जिला–एक उत्पाद: लकड़ी का फर्नीचर
एक जिला–एक पर्यटक स्थल: खाटूश्यामजी मंदिर
एक जिला–एक खेल: बास्केटबॉल
झुंझुनूं से पेड़ा चयनित, चूरू में निर्णय बाकी
इस योजना के तहत पड़ोसी जिले झुंझुनूं से प्रसिद्ध 'पेड़े' का चयन किया गया है। वहीं, चूरू जिले के पारंपरिक व्यंजन का चयन होना अभी बाकी है, जिस पर जिला पर्यटन विकास समिति की आगामी बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
