ट्रंप का बड़ा एक्शन! अमेरिका में भारत की तरह वोटर लिस्ट साफ करने की कवायद

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की चुनावी प्रक्रिया में व्यापक सुधारों की मांग को लेकर अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने मतदाता पंजीकरण के नियमों को कठोर बनाने और नागरिकता सत्यापन प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE America Act) का पुरजोर समर्थन किया है। ट्रंप वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते रहे हैं और इस कानून के माध्यम से केवल पात्र अमेरिकी नागरिकों के मतदान को सुनिश्चित करने की वकालत कर रहे हैं।

भारत के 'SIR' से तुलना और वोटर रिकॉर्ड की जांच

चुनावी रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर जोर देते हुए ट्रंप ने भारत की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया—स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)—का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में भी 2020 के वोटर रिकॉर्ड्स का मिलान नागरिकता डेटा से किया जा रहा है। हालांकि, भारत और अमेरिका के कानूनी ढांचे भिन्न हैं, फिर भी दोनों प्रक्रियाओं में मतदाता पात्रता की जांच का पहलू समान है। ट्रंप के अनुसार, शुरुआती 12.8 करोड़ रिकॉर्ड्स की समीक्षा में 24 हजार से अधिक गैर-नागरिकों से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं और अगले 3.2 करोड़ रिकॉर्ड्स की जांच जारी है। हालांकि, इन आंकड़ों से 2020 के नतीजों पर सीधे सवाल नहीं उठाए जा सकते क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितनों ने वास्तव में मतदान किया था।

क्या है 'सेव अमेरिका एक्ट'?

प्रस्तावित 'सेव अमेरिका एक्ट' का मुख्य उद्देश्य संघीय चुनावों में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के लिए अमेरिकी नागरिकता का आधिकारिक प्रमाण अनिवार्य करना है। इस विधेयक के समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावी सुरक्षा और पारदर्शिता सुदृढ़ होगी। दूसरी ओर, आलोचकों का तर्क है कि सरकारी डेटाबेस के मिलान में होने वाली तकनीकी त्रुटियों के कारण योग्य और वैध मतदाताओं को भी अपने मताधिकार से वंचित होना पड़ सकता है।

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