आरे के जंगलों में अतिक्रमण के खिलाफ बीएमसी की बड़ी कार्रवाई: भारी सुरक्षा के बीच अवैध दरगाह ध्वस्त, करोड़ों की सरकारी जमीन कराई मुक्त

मुंबई | गोरेगांव (पूर्व) स्थित आरे मिल्क कॉलोनी (यूनिट 32) में बनी हजरत सैयद बरकत अली शाह बाबा दरगाह के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ी तोड़क कार्रवाई शुरू की है। बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन के अतिक्रमण और सुरक्षा कारणों के मद्देनजर प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है। परिसर के अवैध हिस्सों को ढहाने के लिए मौके पर 3 भारी बुलडोजर तैनात किए गए हैं, जिन्होंने सुबह 11 बजे से ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी। कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल मुस्तैद है।

हजारों वर्ग फुट सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप और स्थानीय निवासियों का पक्ष

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरे कॉलोनी की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके इस धार्मिक स्थल का निर्माण किया गया था। आरोप है कि दरगाह के नाम पर लगभग 70,000 वर्ग फुट की बेशकीमती सरकारी भूमि पर अवैध तरीके से निर्माण कार्य फैलाया गया था। दूसरी तरफ, स्थानीय निवासियों और दरगाह प्रबंधन से जुड़े लोगों का पक्ष इस दावे से बिल्कुल जुदा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दरगाह कई दशक पुरानी है और इसके वैध होने के पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने कागजी और जमीनी पैमाइश के बाद ही इसे हटाने का फैसला किया है।

भारी पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट

चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से पूरे आरे कॉलोनी क्षेत्र को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। हाल ही में बांद्रा के गरीबनगर इलाके में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम पर हुए पथराव की घटना से सबक लेते हुए, प्रशासन ने यहाँ पहले से ही अतिरिक्त सुरक्षा घेरा तैयार किया है। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने भी संभावित तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन को पहले ही लिखित चेतावनी दी थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए दंगा नियंत्रण पुलिस के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का कानून और किरीट सोमैया का हस्तक्षेप

इस पूरे विवाद को राजनीतिक और सामाजिक मंच पर उठाने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया की अहम भूमिका रही है। सोमैया ने अप्रैल 2026 में इस हरित क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया था और हाल ही में उन्होंने इस परिसर का मुआयना भी किया था। कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो आरे कॉलोनी को एक संरक्षित हरित क्षेत्र (ग्रीन जोन) और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का ही एक हिस्सा माना जाता है। इस पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी तरह का पक्का या कच्चा अतिक्रमण बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए गए दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है, जिसके चलते सभी न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही यह तोड़क कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

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