राजधानी में फिर चलेगा बुलडोजर, जेडीए ने अगले अभियान की तैयारियां तेज कीं

जयपुर। राजस्थान की राजधानी में इन दिनों 'ऑपरेशन 80 फीट' के नाम से चलाए जा रहे महा-अतिक्रमण हटाओ अभियान की गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। शहर के चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से मंगलवार को इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद रखी गईं और मुख्य अभियान स्थल पर किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर सख्त पाबंदी लगा दी गई। कार्रवाई के दौरान मौके पर बने पांच धार्मिक ढांचों को शांतिपूर्ण ढंग से हटा दिया गया, जिससे वहां मलबे का भारी ढेर जमा हो गया है और इसे साफ करने में प्रशासन को पूरा दिन लग जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस प्रस्तावित मार्ग में अभी भी 9 ऐसी इमारतें हैं, जिनके स्वामियों ने न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे) ले रखा है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने इन भवन मालिकों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि वे स्वयं इस कानूनी रोक को हटवा लें, अन्यथा जेडीए इस बाधा को दूर करने के लिए खुद उच्च न्यायालय की शरण लेगा।
टोंक रोड का ट्रैफिक महल रोड पर मोड़ने का मेगा प्लान, पांच बत्तियां होंगी खत्म
वास्तव में यह विशाल कार्रवाई केवल एक क्षेत्र की सड़क को चौड़ा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जेडीए के एक व्यापक मास्टर प्लान की महज एक शुरुआत है। यह पूरा प्रोजेक्ट टोंक रोड से लेकर जगतपुरा महल रोड तक के विशाल भू-भाग के यातायात तंत्र को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार किया गया है। वर्तमान में टोंक रोड पर वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है, क्योंकि स्थानीय ट्रैफिक के साथ-साथ टोंक जिले की ओर जाने वाले वाहन भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। जेडीए का मेगा प्लान यह है कि टोंक जाने वाले इस भारी ट्रैफिक को महल रोड की तरफ डाइवर्ट कर दिया जाए, ताकि लोग मुख्य शहर के जाम में फंसे बिना सीधे सीतापुरा पार करके टोंक की तरफ निकल सकें। इस भारी ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने के लिए महल रोड पर स्थित सभी 5 ट्रैफिक सिग्नलों को हटाकर इस पूरी सड़क को 'सिग्नल-फ्री' बनाया जाएगा, जिसका काम आगामी सितंबर माह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेलवे लाइन के पार गायब हो चुकी सड़क पर चलेगा बुलडोजर, इसी महीने मिलेंगे नोटिस
जेडीए ने दो दिन पूर्व मालवीय नगर को जगतपुरा से जोड़ने वाली नंदपुरी कॉलोनी में इस अभियान का शंखनाद किया था। जिस मार्ग से अवैध निर्माण तोड़े गए हैं, उसके ठीक सामने रेलवे पटरी के समानांतर भी राजस्व रिकॉर्ड में 80 फीट चौड़ी सड़क दर्ज है, जिस पर वर्तमान में भू-माफियाओं और स्थानीय लोगों ने पूरी तरह कब्जा कर रखा है। अतिक्रमण की अधिकता के कारण यह सरकारी सड़क धरातल से पूरी तरह लुप्त हो चुकी है, जिसके चलते यहां सबसे बड़े स्तर पर तोड़फोड़ होने की संभावना है। इस प्रस्तावित मार्ग को पूरी तरह खाली कराने के लिए जेडीए इसी महीने अवैध कब्जाधारियों को बेदखली के कानूनी नोटिस तामील कराने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेडीसी सिद्धार्थ महाजन स्वयं इसी सप्ताह इस संवेदनशील क्षेत्र का मौका-मुआयना कर सकते हैं।
ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की मुहर, सलाहकार फर्म के रूप में नेस्कॉम संभालेगी कमान
टोंक रोड (बी-2 बायपास) से लेकर जगतपुरा और सीतापुरा को आपस में जोड़ने वाली ऐसी दर्जनों लिंक सड़कें हैं, जिनके किनारों पर जयपुर की एक बहुत बड़ी आबादी निवास करती है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि इन अंदरूनी संपर्क मार्गों पर अतिक्रमण बहुत ज्यादा जटिल नहीं है, लेकिन फिर भी सड़क को 80 फीट के निर्धारित दायरे में लाने के लिए कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की कार्रवाई अवश्य की जाएगी। जेडीए के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, पिछले दिनों आयोजित हुई ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की उच्च स्तरीय बैठक में इस क्षेत्र-आधारित यातायात प्रबंधन योजना (एरिया-बेस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान) को विधिवत मंजूरी दी जा चुकी है। इस बेहद जटिल और आधुनिक यातायात व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिष्ठित संस्था 'नेस्कॉम' को मुख्य सलाहकार फर्म के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग और तकनीकी निगरानी करेगी।
