कैबिनेट ने दी मंजूरी, मंडी टैक्स में बढ़ोतरी

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय के भीतर एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में आम जनता, किसानों और प्रदेश के विकास से जुड़े कई बड़े व ऐतिहासिक फैसले लिए गए। बैठक खत्म होने के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री चैतन्य कश्याप ने मीडिया को इन सभी फैसलों की आधिकारिक जानकारी दी।

बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे होने पर उन्हें बधाई दी गई। इस विशेष उपलक्ष्य में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आगामी 21 जून तक पूरे प्रदेश में विभिन्न विकास कार्यों का आयोजन किया जाएगा और 21 जून से विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि वे 15 जून तक हर हाल में तबादलों से जुड़े काम पूरे कर लें, क्योंकि इस समय-सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर किसानों को खाद व उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए।

भोपाल-इंदौर मेट्रो और मंडी टैक्स से जुड़े बड़े फैसले

कैबिनेट बैठक में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिसमें भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजनाओं की लागत बढ़ाने की बात कही गई थी। बढ़ती महंगाई और कंस्ट्रक्शन की लागत में इजाफे को देखते हुए इस खर्च को संशोधित किया गया है। नए संशोधन के बाद भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का बजट 6,941 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10,033 करोड़ रुपये कर दिया गया है, यानी इसमें करीब 3,092 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 30 किलोमीटर लंबी इस मेट्रो लाइन का काम अगले दो साल के भीतर हर हाल में पूरा कर लिया जाए।

इसके साथ ही सरकार ने राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य में मंडी टैक्स को एक प्रतिशत से बढ़ाकर डेढ़ प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से राज्य सरकार के खजाने में लगभग 835 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी, जिसका पूरा इस्तेमाल ग्रामीण अधोसंरचना के विकास और गौ-संवर्धन (गायों की देखभाल व संरक्षण) के कामों में किया जाएगा। हालांकि, कपास उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को प्रति गट्ठर 1 रुपये से घटाकर सिर्फ 50 पैसे कर दिया गया है, ताकि राज्य का कपास मध्य प्रदेश की ही जिनिंग फैक्ट्रियों में प्रोसेस हो सके।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा और 1800 करोड़ का नया कर्ज

किसानों को रासायनिक खेती से दूर करने और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार अब प्रदेश के हर जिले में विशेष कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी। इस दिशा में ब्रिक्स देशों के आगामी सम्मेलन में प्राकृतिक खेती को लेकर एक बड़ा सत्र भी शामिल किया गया है।

दूसरी तरफ, अपनी वित्तीय जरूरतों और विकास योजनाओं को गति देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार बाजार से दो किस्तों में 1,800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। इसके लिए दो अलग-अलग राज्य विकास ऋण के री-इश्यू का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। इस नए कर्ज को मिलाकर मौजूदा चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार पर कुल कर्ज 11,000 करोड़ रुपये हो जाएगा, जिससे प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 4,99,714 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का व्यस्त कार्यक्रम

कैबिनेट बैठक के अलावा मुख्यमंत्री का मंगलवार का पूरा शेड्यूल काफी व्यस्त रहा। वे सुबह 10:45 बजे मंत्रालय पहुंचे, जिसके बाद 10:50 बजे कैबिनेट ब्रीफिंग हुई और ठीक 11 बजे कैबिनेट की मुख्य बैठक शुरू हुई। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे उन्होंने 'सिंहस्थ 2028' की भव्य तैयारियों के लिए गठित मंत्रिमंडलीय समिति के साथ बैठक कर समीक्षा की। दोपहर 2:00 बजे कुछ महत्वपूर्ण मुलाकातों के बाद, दोपहर 3:00 बजे उन्होंने योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश के आर्थिक रोडमैप को लेकर गहन चर्चा की।

Leave a Reply