दूसरे पुरुष के लिए व्रत रखने के आरोपों से जुड़ा मामला, जयपुर फैमिली कोर्ट ने विवाह विच्छेद किया

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के फैमिली कोर्ट-2 ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि वैवाहिक बंधन के जीवित रहते हुए किसी अन्य पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखना, उसके नाम की मेहंदी अपने हाथों पर सजाना और उसे पति के रूप में स्वीकार करना कानूनन व्यभिचार तथा गंभीर मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने इसी आचरण को मुख्य आधार बनाते हुए प्रार्थी पति की तलाक की अर्जी को पूरी तरह स्वीकार कर लिया तथा दोनों के बीच तेरह वर्ष पुराने वैवाहिक रिश्ते को समाप्त करने का आदेश पारित किया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में यह भी रेखांकित किया कि पत्नी का यह कृत्य सामान्य मैत्री संबंधों की स्वीकृत सीमा का खुला उल्लंघन है।

पति को दाम्पत्य जीवन से वंचित रखना और अन्य पुरुष के साथ वैवाहिक आचरण

फैमिली कोर्ट के पीठासीन अधिकारी विशाल भार्गव ने अपने विस्तृत आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्नी का इस प्रकार का आचरण पति के प्रति अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना और क्रूरता को दर्शाता है। किसी भी वैवाहिक रिश्ते में पति को लंबे समय तक दाम्पत्य सहचर्य से वंचित रखना और उसके अधिकारों की उपेक्षा करना कानूनन मानसिक यातना है। अदालत ने माना कि विवाह के पवित्र रिश्ते के कायम रहते हुए किसी अन्य व्यक्ति के साथ वैवाहिक जीवन जैसी गतिविधियां संचालित करना न केवल अनैतिक है, बल्कि विधिक रूप से भी पूरी तरह अस्वीकार्य है। इन सभी तथ्यों को मद्देनजर रखते हुए अदालत ने पति द्वारा प्रस्तुत की गई तलाक की याचिका को न्यायसंगत ठहराया।

गोवा में फेरे लेने और अन्य पुरुष के लिए व्रत रखने के मिले ठोस प्रमाण

न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान यह अहम तथ्य भी प्रकाश में आया कि पत्नी ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया था कि उसने किसी अन्य पुरुष के साथ गोवा जाकर फेरे लिए थे और उसके साथ वैवाहिक संबंधों जैसा बर्ताव किया था। इसके अतिरिक्त, महिला द्वारा उस गैर-व्यक्ति के लिए करवा चौथ का उपवास रखना और उसके नाम की मेहंदी अपने हाथों पर लगवाना ऐसे अकाट्य प्रमाण थे, जिन्हें अदालत ने स्पष्ट रूप से व्यभिचार का ठोस आधार माना। इन्हीं तमाम साक्ष्यों और परिस्थितियों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद फैमिली कोर्ट ने तेरह वर्ष पुराने इस विवाह को विच्छेदित करने का निर्णय सुनाया।

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