नौकरी छंटनी पर चीन की सख्ती, कंपनियों को नियमों का करना होगा पालन

बीजिंग। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और श्रम बाजार पर मंडराते बेरोजगारी के खतरे से निपटने के लिए चीन सरकार ने एक महत्वाकांक्षी 18 सूत्रीय योजना लागू की है। स्टेट काउंसिल के जनरल ऑफिस द्वारा जारी इन दिशा-निर्देशों के तहत देश की सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य किया गया है कि वे किसी भी एआई तकनीक को लागू करने से पहले कर्मचारियों पर उसके प्रभाव का विस्तृत आकलन करें। इस नीति का मुख्य उद्देश्य तकनीकी विकास को रोजगार के अनुकूल बनाना है ताकि ऑटोमेशन के दौर में आम नागरिकों की आजीविका सुरक्षित रहे।
अनइम्प्लॉयमेंट बफर पीरियड और पुनः तैनाती का प्रावधान
इस कार्ययोजना का प्रमुख प्रावधान अनइम्प्लॉयमेंट बफर पीरियड की व्यवस्था है। इसके तहत यदि कोई कंपनी बड़े पैमाने पर एआई लागू करती है, तो वह कर्मचारियों को अचानक नौकरी से नहीं निकाल सकती। प्रबंधन को अपने कर्मियों को पूर्व सूचना देनी होगी, नई तकनीक सीखने का अवसर प्रदान करना होगा और कंपनी के भीतर अन्य विभागों में उनकी पुनः तैनाती का खाका तैयार करना होगा। आंतरिक समायोजन न होने की स्थिति में कंपनियों को कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक रोजगार तलाशने में मदद करनी होगी।
श्रम-प्रधान और जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए अलग नियम
गाइडलाइंस में टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन जैसे अधिक श्रम वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन उद्योगों में अंधाधुंध ऑटोमेशन पर सतर्क रुख अपनाने का निर्देश है ताकि अचानक बड़ी आबादी बेरोजगार न हो। इसके विपरीत, इंसानों के लिए अत्यधिक खतरनाक या श्रम की कमी वाले क्षेत्रों में एआई और रोबोटिक्स को प्राथमिकता देने की छूट दी गई है।
बड़े पैमाने पर रीस्किलिंग और पुनर्वास की योजना
सरकार ने नए अवसरों के मद्देनजर रीस्किलिंग का विस्तृत ढांचा तैयार किया है। विश्वविद्यालयों और वोकेशनल कॉलेजों को एआई से जुड़े कोर्स जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्रशिक्षण केवल छात्रों तक सीमित न रहकर प्रवासी मजदूरों, बेरोजगार युवाओं और नौकरी गंवा चुके कामगारों के लिए चलाए जाने वाले विशेष कैंपों के माध्यम से भी दिया जाएगा। इसके अलावा नौकरी गंवा चुके लोगों को करियर काउंसलिंग और नया व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी ताकि सामाजिक स्थिरता बनी रहे।
