CJP का बड़ा बयान: जंतर-मंतर हिंसा में पुलिस को गंभीर चोटें नहीं आईं

नई दिल्ली: नीट परीक्षा धांधली और पर्चा लीक मामले में संसद मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हुई झड़प के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली पुलिस द्वारा जारी घायलों के आंकड़ों को खारिज करते हुए उन पर भ्रामक संदेश फैलाने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बरता से बल प्रयोग किया गया, जबकि मामूली धक्का-मुक्की में लगी सामान्य खरोंच को पुलिस गंभीर चोट बता रही है।

CJP ने पुलिस के आंकड़ों पर उठाए सवाल

CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने अस्पतालों के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि लगभग 98 से 99 प्रतिशत पुलिसकर्मियों को सिर्फ हल्की (सॉफ्ट टिश्यू) चोटें आई हैं। सौरव दास ने आरोप लगाया कि धक्का-मुक्की के दौरान मामूली खरोंचें आना स्वाभाविक है, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी बड़े-बड़े बैंडेज बांधकर स्थिति को जबरन गंभीर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन में पथराव के कारण 118 से ज्यादा जवान घायल हुए थे।

छात्रों पर अत्याचार का आरोप और निष्पक्ष जांच की मांग

संगठन ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों और महिला अभ्यर्थियों के साथ मारपीट की। CJP ने मांग की है कि जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर हुए इस बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों के खिलाफ दर्ज मामलों को तुरंत वापस लेने की भी पैरवी की गई है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और मुआवजे की मांग पर अड़ा संगठन

पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और धांधली के कारण आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। उधर, सोनम वांगचुक द्वारा अनशन खत्म किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास ने कहा कि वे उनके फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन जब तक उनकी मुख्य मांगें पूरी नहीं हो जातीं, जंतर-मंतर पर छात्रों का यह आंदोलन जारी रहेगा।

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