बैठक में महिला अफसर और विधायक में टकराव, मामला पहुंचा निलंबन तक

भरतपुर। राजस्थान के बयाना इलाके में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (EO) और स्थानीय विधायक के बीच तीखी झड़प हो गई। आधिकारिक बैठक के दौरान महिला अफसर मर्यादा भूलकर जनप्रतिनिधि से सरेआम उलझ गईं और कथित तौर पर अभद्र भाषा व 'तू-तड़ाक' का प्रयोग करते हुए उन्हें देख लेने की धमकी देने लगीं। इस पूरे वाकये का एक लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित (वायरल) हो गया, जिसके बाद प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है। दरअसल, बयाना क्षेत्र की निर्दलीय महिला विधायक ऋतु बनावत नगर पालिका कार्यालय में विकास कार्यों की समीक्षा कर रही थीं, तभी एक ही निर्माण फर्म को बार-बार सारे टेंडर आवंटित किए जाने के मुद्दे पर सवाल उठाने से यह पूरा विवाद पैदा हुआ।
सरकारी बैठक में रिश्तेदार का हस्तक्षेप और अधिकारी का भड़का गुस्सा
समीक्षा बैठक के दौरान जब निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत ने नगर पालिका के सिंगल-फर्म टेंडर आवंटन की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई, तो बैठक में अनाधिकृत रूप से मौजूद ईओ अनिता कुशवाह का सगा भतीजा चर्चा के बीच में हस्तक्षेप करने लगा। सरकारी विमर्श में बाहरी व्यक्ति के दखल को देखते हुए विधायक ने पद की गरिमा का हवाला दिया और उसे तत्काल सभाकक्ष से बाहर जाने का निर्देश दे दिया। अपने रिश्तेदार को बैठक से बाहर निकाले जाने पर अधिशासी अधिकारी अनिता कुशवाह बुरी तरह भड़क उठीं और उन्होंने अपना प्रशासनिक आपा खो दिया।
अभद्र शब्दावली का प्रयोग और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
आपा खो चुकीं ईओ अनिता कुशवाह ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए विधायक को सीधे चुनौती दी और कहा कि तुमने मेरे भतीजे को बाहर निकालने की हिम्मत कैसे की, वह मेरे परिवार का हिस्सा है। अधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से किए गए इस आपत्तिजनक व्यवहार और अमर्यादित भाषा के बाद बैठक अखाड़े में तब्दील हो गई, जिसे वहां मौजूद अन्य मातहत कर्मचारी शांत कराने की कोशिश करते दिखे। इस हाई-प्रोफाइल विवाद का वीडियो इंटरनेट पर आते ही विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका मिल गया, जिसके बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रशासनिक अनुशासनहीनता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया।
विवाद बढ़ने पर त्वरित एक्शन, छह घंटे के भीतर महिला अफसर सस्पेंड
जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय और उच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुंचा, राज्य सरकार ने बिना कोई वक्त गंवाए कड़ी कार्रवाई की। विवाद की गंभीरता और जनप्रतिनिधि के अपमान को देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने महज छह घंटे के भीतर जांच बिठाकर आरोपी महिला ईओ अनिता कुशवाह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया। हालांकि, इस त्वरित दंडात्मक कार्रवाई के बावजूद इस घटना ने नौकरशाही और लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए प्रतिनिधियों के बीच के आपसी तालमेल तथा प्रशासनिक अनुशासन की सीमाओं पर एक नई और गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।
