CM शिवकुमार का बड़ा आदेश, ऐप से दर्ज होगी कर्मचारियों की हाजिरी

बेंगलुरु: राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की लेटलतीफी पर लगाम लगाने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। अब सूबे के सभी सरकारी मुलाजिमों को सुबह 10 बजे तक हर हाल में अपने दफ्तर पहुंचना होगा। इसके साथ ही, उन्हें 'कर्तव्य' मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों की अनदेखी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद मुख्य सचिव का आदेश
मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश द्वारा जारी इस आधिकारिक आदेश में साफ कहा गया है कि यह फैसला मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लिया गया है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी दफ्तरों में कामकाज के समय को लेकर बरती जा रही ढिलाई और कर्मचारियों के देर से आने की आदत पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद प्रशासन को यह कड़े निर्देश जारी करने पड़े।
AI तकनीक से होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग, तैयार होगी 'डिफॉल्टर्स' की लिस्ट
नए नियमों के मुताबिक, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (अपर मुख्य सचिव) से लेकर जिला स्तर के छोटे-बड़े सभी अधिकारी-कर्मचारियों को रोजाना 'कर्तव्य' ऐप पर अपनी एंट्री (चेक-इन) और एग्जिट (चेक-आउट) दर्ज करनी होगी।
स्मार्ट ट्रैकिंग: ई-गवर्नेंस विभाग ने इसके लिए एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है।
ऑटोमैटिक रिपोर्ट: यह सिस्टम सुबह 10 बजे तक हाजिरी न लगाने वाले कर्मचारियों की जिला-वार और विभाग-वार रिपोर्ट खुद-ब-खुद तैयार कर देगा।
सीधी कार्रवाई: यह रिपोर्ट सीधे संबंधित विभाग के प्रमुखों के पास पहुंच जाएगी, ताकि लापरवाह कर्मचारियों पर तुरंत एक्शन लिया जा सके।
फील्ड ड्यूटी और दौरों के लिए क्या हैं नियम?
जो अधिकारी या कर्मचारी किसी सरकारी काम, आधिकारिक दौरे या फील्ड ड्यूटी पर रहेंगे, उन्हें ऐप में 'आउट ऑफ ऑफिस ड्यूटी' (OOD) का विकल्प चुनना होगा। हालांकि, उनकी इस हाजिरी को उनके सीनियर (सुपरवाइजरी) अधिकारी द्वारा सत्यापित (वेरिफाई) किया जाना जरूरी होगा। सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे हर दिन 'कर्तव्य' डैशबोर्ड के जरिए अटेंडेंस की जांच करें।
पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की कोशिश
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सरकारी तंत्र को जनता के प्रति अधिक सक्रिय और जिम्मेदार बनाया जाए। आपको बता दें कि 'कर्तव्य' ऐप पहले से ही कुछ चुनिंदा विभागों में ट्रायल के तौर पर चल रहा था, लेकिन अब इसके सकारात्मक नतीजों को देखते हुए इसे पूरे राज्य में पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
