कांग्रेस का संसद परिसर में हंगामा, किसान और UCC को लेकर सरकार पर हमला

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र का आगाज सोमवार को हंगामेदार शुरुआत के साथ हुआ। आगामी 24 जुलाई तक संचालित होने वाले इस अल्पकालिक सत्र के प्रथम दिवस ही विपक्ष ने विधानसभा परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस विधायकों ने किसानों से जुड़ी समस्याओं और प्रस्तावित नीतियों को लेकर मोहन यादव सरकार को जमकर घेरा। इस सत्र के दौरान राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष का प्रथम अनुपूरक बजट प्रस्तुत किए जाने के साथ ही कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पटल पर रखे जाने की संभावना है।

समान नागरिक संहिता विधेयक पर सत्ता पक्ष का रुख

विधानसभा सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित विधेयक प्रस्तुत किए जाने की चर्चाओं के बीच सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने सरकार के कदम का मजबूती से समर्थन किया है। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने स्पष्ट किया कि वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए यह कानून अत्यंत आवश्यक है और राज्य सरकार इसे लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वहीं राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस कदम को समय की मांग बताते हुए इसे जनहित में उठाया गया सही निर्णय करार दिया।

किसानों और यूसीसी के मुद्दे पर विपक्ष का जोरदार विरोध

सत्र की कार्यवाही औपचारिक रूप से प्रारंभ होने से पूर्व ही विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों ने विधानसभा भवन के बाहर एकत्रित होकर उग्र नारेबाजी और प्रदर्शन किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की मूलभूत समस्याओं को अनदेखा कर रही है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे मुख्य जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया और सदन के अंदर तथा बाहर आक्रामक रुख बनाए रखने के संकेत दिए।

सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश करेगी सरकार

इस पांच दिवसीय मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार का मुख्य ध्यान विधायी कार्यों और वित्तीय प्रबंधन को सुचारू बनाने पर रहेगा। चालू वित्तीय वर्ष के पहले अनुपूरक बजट के माध्यम से विकास योजनाओं और विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त शासन द्वारा जनहित से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों एवं संशोधनों को भी सदन की स्वीकृति के लिए पटल पर रखे जाने की पूरी तैयारी की गई है।

हंगामे के बीच विधायी कार्यों को पूरा कराने की चुनौती

मानसून सत्र की संक्षिप्त अवधि और विपक्ष के आक्रामक रुख को देखते हुए सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करना सत्ता पक्ष और असेंबली प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा। जहाँ एक ओर विपक्ष किसानों, कानून-व्यवस्था और नीतिगत विषयों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार अनुपूरक बजट सहित सभी निर्धारित विधायी एजेंडों को समयावधि के भीतर पारित कराने के लिए प्रयासरत है।

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