50 माइक्रॉन से कम प्लास्टिक पर शिकंजा, मुंबई के 26 विभागों में शुरू होगी जांच

मुंबई। मुंबई शहर में प्रतिदिन निकलने वाले हजारों टन कचरे और मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की विधि एवं राजस्व समिति ने सख्त रुख अपनाया है। समिति की अध्यक्ष दीक्षा कारकर ने महानगरपालिका के लाइसेंस विभाग तथा दुकानें एवं प्रतिष्ठान विभाग को पत्र लिखकर 50 माइक्रॉन से कम मोटाई वाली सिंगल-यूज प्लास्टिक थैलियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर दंडात्मक अभियान चलाने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से सड़कों पर बैठने वाले फेरीवालों और प्लास्टिक के बड़े गोदाम संचालकों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए हैं।
नालों में जलजमाव और पर्यावरण क्षति के लिए पतली प्लास्टिक जिम्मेदार
पत्र के माध्यम से दीक्षा कारकर ने बताया कि मुंबई में रोजाना औसतन 6,300 मीट्रिक टन से अधिक कचरा एकत्र होता है, जिसमें प्रतिबंधित और पतली प्लास्टिक थैलियों की हिस्सेदारी चिंताजनक स्तर पर है।
यह नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है और बारिश के दौरान बहकर शहर के प्रमुख नालों और गटरों में फंस जाता है। इसके कारण जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो जाती है और निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है, जिसका सीधा असर नागरिकों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर पड़ता है।
सभी 26 प्रशासनिक वार्डों में नियमित निरीक्षण और रिपोर्ट की मांग
जलभराव और प्लास्टिक प्रदूषण की दोहरी चुनौती से निपटने के लिए अध्यक्ष ने बीएमसी प्रशासन के समक्ष स्पष्ट कार्ययोजना रखी है।
गोदामों और फेरीवालों की जांच: मुंबई के सभी 26 प्रशासनिक वार्डों (विभागों) में लाइसेंसिंग और दुकान निरीक्षकों द्वारा नियमित छापेमारी की जाए।
तत्काल दंडात्मक कार्रवाई: निरीक्षण के दौरान 50 माइक्रॉन से कम की थैलियों का भंडारण, बिक्री या उपयोग पाए जाने पर संबंधित फेरीवाले, दुकानदार या गोदाम मालिक के खिलाफ ऑन-द-स्पॉट सख्त कार्रवाई की जाए।
विभागीय रिपोर्ट तलब: केवल निर्देश जारी करने के बजाय प्रत्येक वार्ड से की गई दैनिक एवं साप्ताहिक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मंगाई जाए, ताकि अभियान की वास्तविक प्रगति का पारदर्शी मूल्यांकन हो सके।
कागजी आदेशों से आगे बढ़कर मजबूत निगरानी प्रणाली की जरूरत
दीक्षा कारकर ने अपने पत्र में बल देकर कहा है कि मानसून के दौरान मुंबई को डूबने से बचाने के लिए सिर्फ औपचारिक आदेश जारी करना काफी नहीं है। प्रशासन को जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी व्यवस्था स्थापित करनी होगी। यदि फेरीवालों से लेकर बड़े वितरकों तक आपूर्ति श्रृंखला को नियमित चेकिंग के जरिए बाधित किया जाता है, तो प्लास्टिक कचरे पर प्रभावी रोक लगेगी और नालों की रुकावट कम होने से जलभराव की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।
