ई-नीलामी में DDA को बड़ा फायदा, संपत्तियों के लिए लगी उम्मीद से तीन गुना बोली

नई दिल्ली। देश के अन्य महानगरों की तुलना में राजधानी दिल्ली में जमीन, मकान और व्यावसायिक संपत्तियां खरीदने के प्रति निवेशकों का आकर्षण आज भी चरम पर है। इस बात की तस्दीक दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की हालिया भव्य ई-नीलामी के नतीजों से साफ तौर पर होती है, जहां संपत्तियों को हासिल करने के लिए खरीदारों ने खजाना खोल दिया। जिन संपत्तियों की न्यूनतम आरक्षित कीमत (बेस प्राइस) कुल 480.38 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, उन्हें खरीदने के लिए निवेशकों ने उम्मीदों से बढ़कर 1,321.21 करोड़ रुपये तक की सर्वोच्च बोलियां लगा दीं। इस डिजिटल नीलामी में कई भूखंड तो अपने तय मूल्य से तीन गुना से भी अधिक महंगे दामों पर बिके, जो दिल्ली के रियल एस्टेट बाजार की मजबूती को रेखांकित करता है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इस शानदार सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे दिल्ली को एक वैश्विक निवेश और वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करने के विजन की अहम कामयाबी करार दिया है।

कड़कड़डूमा के भूखंड के लिए मची होड़, लगीं रिकॉर्ड बोलियां

इस पूरी नीलामी प्रक्रिया के दौरान सबसे कड़ी और दिलचस्प प्रतिस्पर्धा पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा क्षेत्र में देखने को मिली, जिसके नतीजों ने बाजार के जानकारों को भी हैरत में डाल दिया। कड़कड़डूमा के पॉकेट 21-22 में स्थित एक व्यावसायिक भूखंड (कमर्शियल प्लॉट) को अपने नाम करने के लिए 36 बड़े खरीदार आमने-सामने थे और अंततः यह प्लॉट अपनी आरक्षित कीमत से 10 गुना से भी अधिक की रिकॉर्ड कीमत पर नीलाम हुआ। इसी प्रकार, कड़कड़डूमा के ही एक अन्य संस्थागत भूखंड (नंबर 3ए) पर मालिकाना हक पाने के लिए 20 दिग्गजों के बीच ऐसी होड़ मची कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल 3,160 बार बोलियां बदली गईं। उपराज्यपाल ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह रुझान दर्शाता है कि बेहतरीन कनेक्टिविटी और प्राइम लोकेशन वाली संपत्तियों के लिए निवेशक बड़ा से बड़ा दांव लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

कियोस्क से लेकर ग्रुप हाउसिंग साइट्स तक की भारी मांग

डीडीए ने इस बार निवेशकों के समक्ष संपत्तियों की एक अत्यंत विस्तृत और विविध रेंज पेश की थी, जिसमें हर वर्ग के खरीदारों की जरूरतों का ध्यान रखा गया। नीलामी के बेड़े में कुल 142 संपत्तियां उतारी गई थीं, जिनमें केवल कॉरपोरेट स्तर के बड़े भूखंड ही शामिल नहीं थे, बल्कि लघु और मध्यम उद्यमियों के लिए भी पर्याप्त अवसर मौजूद थे। इस सूची में आवासीय, औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत प्लॉट्स के साथ-साथ बड़ी ग्रुप हाउसिंग साइट्स, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के भीतर निर्मित दुकानें, मल्टीलेवल पार्किंग के स्थान और छोटे कियोस्क (खोखे) तक शामिल किए गए थे। प्रत्येक श्रेणी की संपत्ति के लिए खरीदारों ने बढ़-चढ़कर दावेदारी पेश की, जिससे साबित होता है कि दिल्ली का बाजार चौतरफा विकास के लिए पूरी तरह तैयार है।

पारदर्शी ई-नीलामी प्रणाली और दिल्ली को वैश्विक स्वरूप देने का संकल्प

प्राधिकरण द्वारा यह पूरी परिसंपत्ति आवंटन प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित की गई, जो पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रही। अधिकारियों के अनुसार, ई-नीलामी का यह आधुनिक माध्यम 'प्राइस डिस्कवरी' यानी बाजार की वास्तविक मांग के अनुरूप किसी भी संपत्ति की सही और न्यायसंगत कीमत तय करने में बेहद कारगर सिद्ध हुआ है, जिसमें बोलीदाताओं की तकनीकी सहायता के लिए एक समर्पित हेल्पडेस्क भी सक्रिय रहा। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि आरक्षित मूल्य पर मिला 175 प्रतिशत का यह बंपर प्रीमियम प्रमाणित करता है कि दिल्ली की धरती आज भी निवेश का सबसे सुरक्षित ठिकाना है। उन्होंने दोहराया कि प्रशासन दिल्ली को एक स्वच्छ, सुरक्षित, आधुनिक आवासीय सुविधाओं और विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे से सुसज्जित वैश्विक महानगर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और यह सफल नीलामी उसी दिशा में बढ़ाया गया एक मजबूत कदम है।

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