बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ मूक-बधिर छात्रों का आक्रोश, गहलोत ने उठाए सवाल

जयपुर| राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में बुधवार को व्यवस्थाओं की पोल खुल गई और बदइंतजामी के खिलाफ दिव्यांग छात्र-छात्राओं का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं और अधिकारों के अभाव से जूझ रहे मूक-बधिर छात्रों ने स्कूल के मुख्य गेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि छात्रों ने सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज), हाथों में तख्तियों और लिखित संदेशों के माध्यम से अपनी गहरी पीड़ा और नाराजगी जाहिर की। विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कुछ समय के लिए स्कूल का मुख्य गेट बंद कर प्रिंसिपल और अन्य स्टाफ को भी अंदर ही रोक लिया। मामला तूल पकड़ते ही शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों और भारी पुलिस बल को मौके पर पहुंचना पड़ा।

छात्रों के गंभीर आरोप: पानी, शौचालय और भोजन की बदहाली

प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं का आरोप है कि स्कूल परिसर में पीने के शुद्ध पानी तक की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा हॉस्टल और स्कूल के शौचालय पूरी तरह बदहाल हैं और उपयोग करने लायक नहीं हैं। कई कक्षाओं की दीवारों और कमरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हॉस्टल में मिलने वाला भोजन न तो पर्याप्त है और न ही उसकी गुणवत्ता ठीक है, साथ ही पूरे परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था भी बेहद खराब स्थिति में है।

पढ़ाई के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं शिक्षक

छात्रों ने प्रबंधन पर कड़े आरोप लगाते हुए कहा कि इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) में प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों की भारी कमी है। कुछ शिक्षक कक्षाओं में नियमित रूप से पढ़ाने के बजाय अपने मोबाइल फोन चलाने में ही व्यस्त रहते हैं। शिक्षा विभाग को सौंपे गए शिकायत पत्र में एक पुरुष स्टाफ मेंबर पर छात्राओं के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाते हुए उसकी निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई। इसके अलावा, बीमार होने पर बच्चों के माता-पिता से बात कराने और उन्हें अस्पताल ले जाने के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूलने जैसे संगीन आरोप भी लगाए गए हैं।

प्रिंसिपल पद से हटाए गए, कई पर गिरी गाज

छात्रों के इस उग्र प्रदर्शन के बाद मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBO) आशा गुप्ता ने तुरंत स्कूल का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान सफाई व्यवस्था, जर्जर भवन और प्रशासनिक कामकाज में कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल भारत जोशी को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया। इसके साथ ही एक शिक्षक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को एपीओ (अनुकंपा/प्रतीक्षारत) कर दिया गया, जबकि स्कूल के वाइस प्रिंसिपल को नए कार्यवाहक प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। विद्यालय की समस्त समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एक विशेष जांच कमेटी का भी गठन किया गया है, जो जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी।

राजनीतिक गलियारों में भूचाल, अशोक गहलोत और सचिन पायलट का हमला

इस संवेदनशील मामले ने अब बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है जिन्हें खुद सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) तक नहीं आती है। उन्होंने राज्य सरकार से संवेदनशीलता दिखाने और व्यवस्थाओं को तुरंत सुधारने की मांग की।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे भाजपा सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति बताते हुए कहा कि आज विशेष आवश्यकता वाले मासूम बच्चों को अपनी बुनियादी और मूलभूत सुविधाओं के लिए भी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि अब मूक-बधिर बच्चे नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार खुद मूक-बधिर और बहरी बन चुकी है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले हर शख्स के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

Leave a Reply