धनियामऊ बना ‘जहाज वाला गांव’, 21 जहाज और 100 से ज्यादा शिपिंग कंपनियों का दावा

जौनपुर | उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित वाराणसी-सुल्तानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप बसा धनियामऊ गांव आज देश-दुनिया में एक अनोखी पहचान बना चुका है, जिसे स्थानीय लोग गर्व से 'जहाज वाला गांव' कहते हैं। लगभग दो हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव के हर घर का कोई न कोई सदस्य पानी के बड़े-बड़े जहाजों की मरम्मत, निर्माण और उनके सफल संचालन के कारोबार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। इस गांव के निवासियों के पास आज अपने जहाजों के अलावा 100 से अधिक पंजीकृत शिपिंग कंपनियां हैं, जो इस क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि की कहानी बयां करती हैं।
कैसे पड़ी इस अनोखे सफर की नींव?
गांव के विष्णु नारायण मंदिर में आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान में शिरकत करने आए वरिष्ठ उद्यमी प्रेम शंकर मिश्रा बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय भोला नाथ मिश्रा ने वर्ष 1930 के दशक में मझगांव डाक पर एक साधारण लुहार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने गुजरात की एक शिपिंग कंपनी के साथ काम करना शुरू किया, जिसके बेड़े में उस समय 17 से 18 जहाज हुआ करते थे।
आगे चलकर भोला नाथ मिश्रा ने वर्ष 1948 में अपनी खुद की 'मानकेश्वर मैकेनिकल कंपनी' की स्थापना की। उन्होंने न केवल खुद तरक्की की, बल्कि अपने गांव के तमाम युवाओं और रिश्तेदारों को भी मुंबई बुलाकर इस काम का हुनर सिखाया और यहीं से इस ऐतिहासिक सिलसिले की मजबूत शुरुआत हुई। प्रेम शंकर मिश्रा का कहना है कि नब्बे के दशक यानी 1995 तक शिपिंग सेक्टर में उत्तर भारत के लोगों की उपस्थिति लगभग नगण्य थी, लेकिन आज इस क्षेत्र में यहां के लोगों का दबदबा और मजबूत पकड़ है। वर्तमान समय में वाराणसी और आसपास के इलाकों में कई निजी मैरीटाइम ट्रेनिंग सेंटर खुल चुके हैं, जहां से छह महीने का विशेष प्रशिक्षण लेकर युवा सीधे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू शिपिंग कंपनियों में रोजगार पा रहे हैं। योग्यता और पद के हिसाब से यहां के युवाओं को शुरुआती दौर में ही एक हजार से डेढ़ हजार डॉलर तक की मासिक सैलरी मिल जाती है। उनकी कंपनी में जौनपुर के अलावा गोरखपुर और देवरिया जिलों के युवा भी बड़ी संख्या में कार्यरत हैं।
आर्थिक रूप से बेहद संपन्न है यह गांव
गांव के गोपी चंद मिश्रा का मानना है कि भोला नाथ मिश्रा के दिखाए रास्ते और उनकी मेहनत की बदौलत ही आज पूरा गांव आर्थिक रूप से इतना अधिक संपन्न हो चुका है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह गांव काफी आगे है, जहां प्राइमरी स्कूलों से लेकर डिग्री कॉलेज तक की बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा के लिए अलग से कॉलेज भी संचालित हो रहे हैं।
धनियामऊ गांव के 100 से अधिक युवा इंजीनियरिंग (बीटेक) की उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश-विदेश की प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गांव की बहुएं भी उच्च शिक्षित हैं। हालांकि अधिकांश परिवार आजीविका के सिलसिले में मुंबई और अन्य महानगरों में निवास करते हैं, लेकिन विवाह समारोहों, त्योहारों और मेलों के वक्त वे अपने पैतृक गांव जरूर लौटते हैं। गांव के भव्य लक्ष्मी नारायण मंदिर, काली मंदिर और हनुमान मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों में ये परिवार बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। रामलीला जैसे आयोजनों को देखने के लिए लोग अपने पूरे परिवार के साथ दूर-दूर से आते हैं और खुलकर आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं। ग्रामीण अमित मिश्रा बताते हैं कि गांव के विकास कार्यों में हर कोई एकजुट होकर सहयोग करता है, जिसके चलते आज यहां आधुनिक शहर जैसी तमाम सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हैं।
आसपास के अन्य गांवों के युवाओं की भी बदली किस्मत
धनियामऊ की इस सफलता की महक अब आसपास के अन्य गांवों तक भी पहुंच चुकी है। सदर तहसील के बक्शा विकासखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उमरछा गांव के भी 50 से अधिक युवा आज दुनिया के विभिन्न देशों में आ-जा रहे हैं। इनमें कुवैत, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए), ओमान, सऊदी अरब और दुबई जैसे देश प्रमुख हैं।
उमरछा निवासी कमलेश कुमार उपाध्याय बताते हैं कि धनियामऊ गांव की इस प्रेरणा ने उनके पूरे गांव के युवाओं की तकदीर बदल दी है। उनके भाई राजेश उपाध्याय पिछले एक दशक से अधिक समय से इसी सिलसिले में अलग-अलग देशों की यात्राएं कर रहे हैं। गांव के सदाशिव, नलनीश, शुभम, बृजेश, राहुल और सुमित जैसे दर्जनों युवा इस सेक्टर में जुड़कर अपने परिवारों को आर्थिक रूप से बेहद मजबूत बना रहे हैं। स्थानीय स्तर पर युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मड़ियाहूं में पासपोर्ट कार्यालय खोले जाने की भी आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है।
तिलवारी गांव के भी 500 से अधिक लोग शिपिंग सेक्टर में
जौनपुर जिले की सदर, मड़ियाहूं, बदलापुर और शाहगंज तहसीलों के ग्रामीण इलाकों से सबसे बड़ी संख्या में युवा समुद्री जहाजों पर अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं। इसी का परिणाम है कि बदलापुर तहसील क्षेत्र का तिलवारी गांव भी अब एक समृद्ध गांव बन चुका है। अकेले तिलवारी गांव के 500 से अधिक लोग आज शिपिंग इंडस्ट्री में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये लोग जहाजों के रख-रखाव, इंजीनियरिंग कार्यों, तकनीकी मरम्मत, हेल्पर, मैकेनिक, क्रू मेंबर, मरीन इंजीनियर, सेफ्टी इंजीनियर, पंपमैन, लाइटमैन, फिटर से लेकर कैप्टन और सेकंड ऑफिसर जैसे बेहद महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
'वोटर आईडी से पहले युवा बनवाते हैं पासपोर्ट'
ग्राम प्रधान लालचंद प्रसाद का दावा है कि जौनपुर जिले में सबसे अधिक पासपोर्ट धारकों वाला कोई गांव है, तो वह धनियामऊ ही है। दो हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में एक हजार से ज्यादा लोगों के पास वैध पासपोर्ट मौजूद हैं। वह गर्व के साथ कहते हैं कि हमारे यहां के किशोर और युवा वयस्क होने पर वोटर आईडी कार्ड बनवाने से पहले अपना पासपोर्ट बनवाने को प्राथमिकता देते हैं। गांव के ही दिनेश बताते हैं कि धनियामऊ के 20 से 25 लोग अकेले मुंबई में बड़े पैमाने पर ठेकेदारी का व्यवसाय संभाल रहे हैं। हालांकि वे महानगरों में बस चुके हैं, लेकिन जब भी चुनाव का समय आता है, वे अपना कामकाज छोड़कर विशेष रूप से गांव लौटते हैं और अपने मताधिकार का पूरी जिम्मेदारी से प्रयोग करते हैं।
