अल नीनो से भारत में बारिश की स्थिति पर खतरा, जानें वैज्ञानिक क्या कह रहे हैं

बेंगलुरु: प्रशांत महासागर की गहराइयों से उठ रही एक अदृश्य चुनौती अब पूरी दुनिया के मौसम का मिजाज बदलने और भारत पर कहर बरपाने को तैयार खड़ी है। यह कोई साधारण मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि ‘अल नीनो’ (El Nino) नामक वह प्राकृतिक घटना है, जिसकी आहट मात्र से ही दुनिया भर में बाढ़, सूखे और भयंकर लू (हिटवेव) का तांडव मचने की आशंका गहरा जाती है।

जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अल नीनो की दस्तक को बेहद खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि यह पहले से ही बढ़ रहे वैश्विक तापमान की आग में घी डालने का काम करेगी। अमेरिकी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के मौसम विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि इस बार अल नीनो के कारण अटलांटिक महासागर में आने वाले तूफानों का जोर कुछ कम रह सकता है। वहां सामान्य से कम तूफानी गतिविधि होने की 55 प्रतिशत संभावना है, जबकि तूफानों के तेज होने की आशंका महज 10 प्रतिशत ही है।

क्या होता है अल नीनो और ला नीना का खेल?

समुद्र और हवा के बीच होने वाले इस प्राकृतिक बदलाव को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने इसे दो मुख्य भागों में बांटा है:

  • अल नीनो: जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है, तो उसे अल नीनो कहते हैं। इसके सक्रिय होने पर हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी अमेरिका के तटों की ओर बहने लगता है। यह घटना आमतौर पर हर 2 से 7 साल में एक बार होती है और इसका असर 9 से 12 महीने तक रहता है।

  • ला नीना: यह अल नीनो के बिल्कुल विपरीत काम करती है। 'ला नीना' का अर्थ है प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक ठंडा हो जाना। जहां अल नीनो दुनिया में सूखा और गर्मी लाती है, वहीं ला नीना बेहतर बारिश का संकेत होती है।

दुनिया भर में मचेगा तबाही का भूचाल

भले ही अल नीनो की शुरुआत प्रशांत महासागर से होती है, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है। इसकी वजह से भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी व मध्य अफ्रीका और अमेजन के जंगलों को भीषण गर्मी और दावानल (जंगलों की आग) का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर, अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों में इसके कारण भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ आने की आशंका है, जबकि उत्तरी अमेरिका के लोगों को असहनीय गर्मी झेलनी होगी।

भारत पर होगा अल नीनो का सीधा और भयंकर असर

भारत के लिए अल नीनो की खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि इसका सीधा असर देश की लाइफलाइन यानी 'मॉनसून' पर पड़ता है। भारत पर इसके मुख्य प्रभाव कुछ इस तरह दिखेंगे:

  • कमजोर मॉनसून: अल नीनो के सक्रिय होने से मॉनसून के दौरान देश में सामान्य से काफी कम बारिश होने की प्रबल संभावना है।

  • खेती-किसानी को नुकसान: बारिश कम होने का सीधा नुकसान देश के करोड़ों किसानों को भुगतना पड़ेगा, जिससे फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है।

  • महंगाई की मार: अनाज और सब्जियों की पैदावार घटने से आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू सकते हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की थाली पर पड़ेगा।

चुनौती बड़ी है: भारत को आने वाले महीनों में लंबी और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के थपेड़ों (लू) का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस प्राकृतिक संकट से निपटने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो देश को बड़े जल और खाद्यान्न संकट से गुजरना पड़ सकता है।

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