एग्जिट पोल ने चौंकाया, दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह की जीत का अनुमान

दतिया| मध्य प्रदेश की संवेदनशील दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब हर किसी की निगाहें आगामी 3 अगस्त पर टिकी हैं, जिस दिन चुनाव के आधिकारिक परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में यह जानने की उत्सुकता तेज है कि इस मुकाबले में कौन बाजी मारेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए 'रुद्रा रिसर्च' का एग्जिट पोल सामने आया है, जिसके आंकड़ों ने सत्तारूढ़ दल बीजेपी की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
रुद्रा रिसर्च एग्जिट पोल के नतीजे
रुद्रा रिसर्च द्वारा जारी एग्जिट पोल के अनुसार, दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार घनश्याम सिंह बाजी मारते हुए चुनाव जीत सकते हैं, जबकि बीजेपी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी मुकाबले में दूसरे स्थान पर रह सकते हैं। इसके अलावा, आजाद समाज पार्टी (ASP) के उम्मीदवार दामोदर यादव भी इस त्रिकोणीय मुकाबले में अच्छा खासा प्रभाव डालते हुए नजर आ रहे हैं।
यदि यह एग्जिट पोल वास्तविक परिणामों में तब्दील होता है, तो इस सीट पर बीजेपी की तमाम चुनावी रणनीतियां धरी की धरी रह सकती हैं। दरअसल, पार्टी ने यहां से पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाया था, जिसके बाद क्षेत्र में भारी राजनीतिक बवाल देखने को मिला था।
किसे मिल सकता है कितना वोट शेयर?
रुद्रा रिसर्च के इन आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी को बढ़त मिलते हुए लगभग 44 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि बीजेपी के खाते में 39 प्रतिशत वोट जा सकते हैं। इस प्रकार हार और जीत के बीच महज 5 प्रतिशत का ही फासला रहने की संभावना है। इस पोल के अनुसार, क्षेत्रीय स्तर पर आजाद समाज पार्टी भी ठीक-ठाक वोट हासिल करने में कामयाब हो सकती है। हालांकि, असली तस्वीर 3 अगस्त को नतीजे आने के बाद ही साफ होगी।
नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को मिला था टिकट
दतिया सीट पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही यह लगभग तय माना जा रहा था कि बीजेपी एक बार फिर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर ही दांव खेलेगी। इसके पीछे मुख्य वजह यह थी कि वे इस क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके थे। हालांकि, साल 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से यही कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी उन्हीं को मैदान में उतारेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा फेरबदल करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप टिकट बंटते ही पार्टी के भीतर जबरदस्त असंतोष और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। हालांकि बीजेपी ने डैमेज कंट्रोल के तमाम दावे किए थे, लेकिन एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि असंतोष को पूरी तरह शांत नहीं किया जा सका।
