फर्जी टिकट कांड का खुलासा, मुंबई पुलिस ने गिरोह की करतूत उजागर की

मुंबई: मुंबई पुलिस ने रेलवे के आपातकालीन कोटे से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कन्फर्म ट्रेन टिकट हासिल करने वाले एक बड़े और संगठित रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो महाराष्ट्र के लोकभवन के जाली लेटरहेड, नकली मुहरों और राज्यपाल के निजी सहायक के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था।
मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
मलबार हिल थाने की पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मुख्य दलालों के रूप में शत्रुंजय राजकुमार यादव उर्फ अनूप और अमरीश ठक्कर का नाम सामने आया है, जो इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
रेलवे के सत्यापन से हुआ फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा
इस सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब मध्य रेलवे के मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक कार्यालय ने फरवरी 2026 में लोकभवन से कुछ संदिग्ध पत्रों का आधिकारिक सत्यापन मांगा, जिसके बाद जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उन पत्रों पर राज्यपाल के तत्कालीन निजी सहायक के हस्ताक्षर और मुहर पूरी तरह से जाली थे।
देशभर में फैले 200 एजेंटों के नेटवर्क की हो रही जांच
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह की जड़ें देश के विभिन्न राज्यों तक फैली हुई थीं और करीब 200 एजेंट इस सिंडिकेट से जुड़े हुए थे, जो यात्रियों से मोटी रकम वसूलकर वीआईपी कोटे का दुरुपयोग करते थे और अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
