किसानों के क्लेम पर डाका; फर्जी हस्ताक्षर कर सहकारी समिति में किया गया बड़ा फर्जीवाड़ा

जैसलमेर | सहकारिता विभाग के भीतर एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। करीब 70 लाख रुपये के इस गबन मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन प्रबंध निदेशक (MD) और कैशियर को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला साल 2020 का है, जिसमें किसानों के हक की राशि का बंदरबांट किया गया था।
फर्जीवाड़े का तरीका
कनोई ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक से बड़ी धनराशि निकाली गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि तत्कालीन एमडी जगदीश सूथार और व्यवस्थापक नरेश कुमार ने साठगांठ कर करीब 70 किसानों के कृषि क्लेम की राशि हड़प ली। यह पैसा सीधे किसानों के खातों में जाना था, लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इसे नकद निकाल लिया गया।
हटाए जाने के बाद भी हुआ भुगतान
हैरानी की बात यह है कि व्यवस्थापक को पद से हटाने और बैंक को सूचित करने के बावजूद भुगतान जारी रहा। बैंक प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर 70 लाख रुपये का भुगतान किया। पकड़े जाने से बचने के लिए मुख्य शाखा के बजाय चांधन शाखा से लेनदेन किया गया, जो एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था।
अधिकारियों की मिलीभगत और गिरफ्तारी
को-ऑपरेटिव एक्ट के तहत जांच में चार अधिकारी दोषी पाए गए। पुलिस ने अब पूर्व एमडी और कैशियर को दबोच लिया है, जबकि शाखा प्रबंधक फिलहाल फरार है। आरोपियों में से एक वर्तमान में उप रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात था, जिससे विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश के साथ मामले की गहराई से जांच कर रही है।
