जाली दस्तावेज तैयार कर पूर्व महाराजा की जमीन बेच दी, मामले में FIR दर्ज
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जोधपुर: पूर्व सांसद एवं पूर्व राजपरिवार के सदस्य गज सिंह के आम मुख्तारनामा (Power of Attorney) का कथित दुरुपयोग कर उनकी करोड़ों रुपये की संपत्तियां हड़पने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन्हें बेचने का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। इस संबंध में पूर्व राजपरिवार के आम मुख्तियार डॉ. महेंद्र सिंह तंवर की शिकायत पर जोधपुर के उदयमंदिर थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
फर्जी बेचान इकरारनामे तैयार करने का आरोप
दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व सांसद गज सिंह ने 15 अक्टूबर 2015 को दिलीप सिंह के नाम आम मुख्तारनामा जारी किया था। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि यह अधिकार पत्र केवल अदालती कार्यवाहियों, मुकदमों की पैरवी और न्यायिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने तक ही सीमित था। आरोप है कि इसके बावजूद दिलीप सिंह ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर मार्च 2016 में बिना किसी विधिक अधिकार के जमीनों के कूटरचित (फर्जी) बेचान इकरारनामे तैयार कर लिए।
विभिन्न क्षेत्रों की संपत्तियों का कूटरचित बेचान
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2016 के दौरान सोजत, चंडलाई, सोड़ावास और जोधपुर क्षेत्र स्थित बेशकीमती जमीनों को गैर-कानूनी तरीके से बेचा गया। इस दौरान करोड़ों रुपये मूल्य की राजपरिवार की संपत्तियों को खुर्द-बुर्द किया गया। मामले में पुलिस ने 10 लोगों को नामजद किया है:
नामित आरोपी: कमल कंवर, ऊषा कंवर, कैलाश कंवर, प्रियंका कंवर, जेठाराम, भवानी सिंह, दमयंती, गणपतलाल, रविंद्र गौड़ और भरत कुमार।
10 साल बाद टैक्स जमा कराने के पीछे की मंशा
रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपियों ने शुरुआत में इन फर्जी इकरारनामों का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) नहीं कराया था। हालांकि, हाल ही में आरोपियों ने डीआईजी स्टाम्प कार्यालय में टैक्स जमा कराने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया और कुछ इकरारनामों से संबंधित कर जमा भी करा दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि घटना के 10 वर्ष बाद स्टाम्प ड्यूटी और टैक्स जमा कराने का मुख्य उद्देश्य इन कूटरचित दस्तावेजों को वैध रूप देकर संपत्तियों का बेचान करना है। पुलिस ने मामले की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
