उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य सवारी, CM मोहन यादव ने किया पूजन-अर्चन

उज्जैन। श्रावण-भाद्रपद मास के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से सोमवार को भगवान महाकाल की पांचवीं और भव्य शाही सवारी निकाली गई। इस अलौकिक आयोजन में शामिल होने के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे, जिससे पूरा शहर शिवमय हो गया।

एक साथ पांच स्वरूपों में दर्शन

शाही सवारी के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के पांच अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ। परंपरा के अनुसार, भगवान महाकाल चांदी की पालकी में 'चंद्रमौलेश्वर', हाथी पर 'मनमहेश', गरुड़ रथ पर 'शिवतांडव', नंदी पर 'उमा-महेश' और डोल रथ पर 'होलकर स्वरूप' में सवार होकर शहर भ्रमण पर निकले। मंदिर के पुजारी महेश पुजारी के अनुसार, यह होलकर मुखारविंद होलकर राजवंश द्वारा मंदिर समिति को भेंट किया गया था। इस बार की सवारी की मुख्य थीम 'चौरासी महादेव' रखी गई थी, जिससे भक्तों को एक साथ चौरासी महादेव के दर्शन का भी लाभ मिला।

शिप्रा तट पर हुआ भव्य पूजन और पुष्पवर्षा

राजसी ठाठ-बाट के साथ मंदिर से शाम चार बजे शुरू हुई यह सवारी निर्धारित मार्गों—कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षीबाजार, कहारवाड़ी और रामानुजकोट से होते हुए मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के रामघाट पहुँची। रामघाट पर पहुंचते ही आकाश मार्ग से हेलीकॉप्टर द्वारा भगवान महाकाल की सवारी पर पुष्पवर्षा की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुजारियों के साथ विधि-विधान से शिप्रा जल से भगवान महाकाल का अभिषेक और पूजन किया।

पारंपरिक मार्ग से वापसी

शिप्रा तट पर पूजन-अभिषेक संपन्न होने के बाद महाकाल की सवारी रामानुजकोट, गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, जगदीश मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार होते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुँची। सवारी के पूरे मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर भक्तों ने भगवान का स्वागत किया और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।

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