सऊदी अरब पर हूती हमले तेज, ‘मक्का पैक्ट’ के सामूहिक रक्षा वादे पर उठे सवाल

इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष काफी तेज हो गया है। सऊदी अरब ने दावा किया है कि हूती विद्रोहियों ने पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की है, हालांकि हूती विद्रोहियों ने इस हमले से इनकार करते हुए इसे प्रोपोगैंडा बताया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
'मक्का डिफेंस पैक्ट' और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
कुछ समय पहले 'इस्लामिक नाटो' की परिकल्पना को लेकर चर्चा में आया पाकिस्तान इस वक्त कूटनीतिक मोर्चे पर असमंजस में नजर आ रहा है। सऊदी अरब को जब वास्तव में सैन्य सहयोग की आवश्यकता पड़ी, तब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार केवल कड़ी निंदा तक सीमित नजर आई और इस्लामाबाद ने इसे एक साधारण 'सुरक्षात्मक समझौता' करार दिया।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता का बयान
अल अरबिया से बातचीत करते हुए पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के बीच हुआ तथाकथित 'मक्का डिफेंस पैक्ट' पूरी तरह से सामूहिक प्रतिरोध पर आधारित है। उन्होंने इस गठबंधन का बचाव करते हुए कहा कि यह समझौता रातों-रात नहीं बना है, बल्कि इसके पीछे इन देशों के बीच दशकों पुराने रणनीतिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंध हैं।
कूटनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म
सऊदी अरब पर हुए कथित हमलों के बाद इस सुरक्षा समझौते की प्रभावशीलता और जमीनी सच्चाई पर सवाल उठने लगे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जहां एक तरफ पाकिस्तान इस समझौते को अपने पुराने और गहरे संबंधों का नतीजा बताकर पेश कर रहा है, वहीं संकट के समय उसकी व्यावहारिक प्रतिक्रिया केवल बयानों तक ही सीमित दिखाई दे रही है।
