सिर्फ ₹1500 ज्यादा कमाए, तो क्या देना होगा ₹60,000 टैक्स? समझें नियम

नई दिल्ली। पहली बार देखने पर न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) थोड़ा सख्त लग सकता है। कई टैक्सपेयर्स को अक्सर यह डर सताता है कि यदि उनकी सालाना टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख की तय सीमा से महज एक रुपया भी ऊपर निकल गई, तो वे धारा 87A के तहत मिलने वाले पूरे टैक्स रिबेट (Tax Rebate) से हाथ धो बैठेंगे और उन पर भारी-भरकम टैक्स का बोझ आ गिरेगा। लेकिन इनकम टैक्स कानून में इस डर का एक बेहद शानदार इन-बिल्ट समाधान मौजूद है, जिसे 'मार्जिनल रिलीफ' (Marginal Relief) कहा जाता है। यह प्रावधान आपकी थोड़ी सी बढ़ी हुई कमाई पर आपको बहुत बड़े टैक्स के झटके से बचाता है।
₹1500 एक्स्ट्रा आमदनी पर कितना देना होगा टैक्स? समझिए पूरा गणित
मान लीजिए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (कैलेंडर वर्ष 2026) में आपकी कुल टैक्सेबल इनकम $1,201,500$ रुपये है। चूंकि यह आय रिबेट की ₹12 लाख की सीमा को पार कर चुकी है, तो स्लैब रेट के हिसाब से तकनीकी रूप से आपका टैक्स ₹60,225 बनता है। किसी को भी यह बात गलत लग सकती है कि सिर्फ ₹1500 ज्यादा कमाने की वजह से ₹60,000 से ऊपर का टैक्स चुकाना पड़े।
यहीं पर काम आता है मार्जिनल रिलीफ का नियम। न्यू टैक्स रिजीम के तहत नियम यह है कि यदि आपकी आय ₹12 लाख से थोड़ी ऊपर जाती है, तो आपका कुल देय टैक्स केवल उसी बढ़ी हुई रकम तक सीमित कर दिया जाएगा जो सीमा से ऊपर है।
आपकी आय: $1,201,500$ रुपये (₹12 लाख की सीमा से ₹1500 अधिक)।
मार्जिनल रिलीफ के बाद टैक्स: ₹60,225 के बजाय सिर्फ ₹1500।
टैक्स विभाग से मिली राहत: कुल ₹58,725 की पूरी छूट।
ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वालों को नहीं मिलता यह फायदा, न्यू रिजीम है बेहतर
करदाताओं के लिए यहाँ ध्यान देना जरूरी है कि मार्जिनल रिलीफ का यह बेहतरीन फायदा केवल न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) चुनने वालों को ही मिलता है। ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में ऐसी कोई राहत व्यवस्था नहीं है; वहाँ जैसे ही आपकी टैक्सेबल आय ₹5 लाख की सीमा को पार करती है, आपको बिना किसी मार्जिनल रिलीफ के शुरुआती स्लैब रेट से पूरा टैक्स भरना पड़ता है। इसलिए, सीमा के बिल्कुल नजदीक रहने वाले मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए न्यू टैक्स रिजीम एक सुरक्षित और ज्यादा फायदेमंद सौदा साबित हो रहा है।
