US-ईरान टकराव का असर खाड़ी में, बढ़ी सैन्य गतिविधियां और सुरक्षा चिंताएं

मनामा। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी सैन्य जंग की चिंगारी अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल चुकी है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर की गई भीषण बमबारी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव अप्रत्याशित रूप से चरम पर पहुंच गया है। ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई के सीधे अल्टीमेटम के बाद खाड़ी के तमाम देशों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। गुरुवार को बहरीन और कुवैत जैसे शांतिपूर्ण देशों में आसमान थर्रा देने वाले धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे स्थानीय आबादी के बीच भारी दहशत का माहौल है। जिन अरब देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, वहां स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है और पूरा क्षेत्र एक बड़े युद्ध की आशंका से घिर गया है।
बहरीन और कुवैत में सायरन की गूंज, फिफ्थ फ्लीट पर हमले का दावा
गुरुवार को बहरीन के आसमान में अचानक हवाई हमले के सायरन बजने से हड़कंप मच गया। बहरीन के गृह मंत्रालय ने तुरंत सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर नागरिकों से धैर्य रखने और बिना वक्त गंवाए सबसे नजदीकी सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। सायरन बजने के कुछ ही देर बाद राजधानी मनामा में कई जोरदार धमाके सुने गए। इसी बीच ईरानी मीडिया ने सनसनीखेज दावा किया है कि बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण 'फिफ्थ फ्लीट' मुख्यालय को निशाना बनाया गया है, हालांकि अमेरिकी या बहरीन प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, कुवैत की सेना ने बयान जारी कर बताया कि उनके उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया है। कुवैती सेना के मुताबिक, शहर में सुनाई दे रही धमाकों की आवाजें दरअसल डिफेंस सिस्टम की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई की थीं।
हाई अलर्ट पर खाड़ी देश, ईरान के राडार पर अमेरिकी बेस
तनाव की गंभीरता को देखते हुए कतर के गृह मंत्रालय ने भी अपने देश में सुरक्षा खतरे का स्तर बढ़ा दिया है और नागरिकों को घरों के भीतर ही रहने की सख्त हिदायत दी है। कुवैत में भी आपातकालीन सायरन बजाकर लोगों को मुस्तैद रहने को कहा गया है। दरअसल, ईरान के सरकारी मीडिया ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अमेरिका के हमलों का बदला खाड़ी में मौजूद उसके सैन्य अड्डों को तबाह करके लेंगे। वर्तमान में इस पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सेना का एक बड़ा नेटवर्क फैला हुआ है, जो अब ईरान के सीधे निशाने पर है। इसमें कुवैत का अली अल सलेम एयर बेस शामिल है जहां करीब 13,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। वहीं, कतर का अल उदीद एयर बेस मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा कमांड सेंटर है। इसके अलावा यूएई का अल धफरा एयर बेस, सऊदी अरब के सुरक्षा प्रतिष्ठान और जॉर्डन के मिसाइल डिफेंस रडार सिस्टम भी संभावित ईरानी मिसाइलों के दायरे में आ चुके हैं।
सेंटकॉम का दूसरा बड़ा हमला, मंडराया महायुद्ध का खतरा
इन तमाम धमकियों और पलटवार के बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने लगातार दूसरी रात भी ईरान के ठिकानों पर भीषण बमबारी जारी रखी। अमेरिकी सेना का तर्क है कि इन हमलों का एकमात्र उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे वैश्विक व्यापार मार्ग में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करना और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाना है। बहरहाल, दोनों पक्षों की इस जिद के बीच खाड़ी देश एक ऐसे विनाशकारी संघर्ष के मुहाने पर खड़े हैं, जो न केवल इस क्षेत्र की स्थिरता को निगल सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और इसके सामाजिक ताने-बाने को भी तहस-नहस कर सकता है।
