Iran-US Tension: अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का जवाबी हमला, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

वाशिंगटन। वैश्विक कूटनीति और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस समय की सबसे बड़ी हलचल सामने आ रही है, जहां एक तरफ शांति की शुरुआत हुई है तो दूसरी तरफ सैन्य टकराव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस्राइल और चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला के बीच महीनों से जारी खूनी संघर्ष को थामने के लिए एक प्रारंभिक शांति समझौते की आधिकारिक घोषणा की है। वाशिंगटन में इस्राइली राजदूत येखिएल लीटर और लेबनानी राजदूत नादा हमादेह द्वारा हस्ताक्षरित यह त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क लेबनान की संप्रभुता को बहाल करने और नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस ऐतिहासिक शांति वार्ता से ईरान और हिजबुल्ला को पूरी तरह अलग रखा गया है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में सिंगापुर के एक मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद खाड़ी में बारूद सुलग उठा है। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स पर भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने भी आत्मरक्षा का हवाला देते हुए अमेरिका से जुड़े गुप्त ठिकानों पर ताबड़तोड़ पलटवार करने का दावा किया है।
पश्चिम एशिया का नया समीकरण, संप्रभुता की मांग और नेतन्याहू का रुख
इस द्विपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते को लेकर इस्राइल और लेबनान के नेतृत्व की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा है कि इस समझौते का मुख्य लक्ष्य देश की संप्रभुता को बहाल करना और सभी लेबनानी क्षेत्रों से इस्राइली सेना की पूर्ण वापसी सुनिश्चित करना है, ताकि युद्ध और शांति का निर्णय केवल वहां की चुनी हुई सरकार के हाथों में रहे। इसके विपरीत, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस त्रिपक्षीय समझौते को ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक बहुत बड़ा झटका बताया है। नेतन्याहू ने साफ लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि भले ही यह प्रारंभिक समझौता हो गया हो, लेकिन जब तक लेबनान की सेना हिजबुल्ला का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण (हथियार छीनना) नहीं कर देती, तब तक इस्राइली सेना दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक मोर्चों पर मजबूती से डटी रहेगी।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी, सुलेमानी का जिक्र और ईरान का प्रतिशोध
खाड़ी में बढ़े इस ताजा तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। एक नीति सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका ने एक ऐसी विधिक रूपरेखा तैयार की है जिसके बाद ईरान चाहकर भी कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं कर पाएगा। ईरान द्वारा हाल ही में किए गए संघर्षविराम उल्लंघन और अमेरिकी हमलों पर बोलते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने अपनी हरकतों पर लगाम नहीं लगाई तो उसे इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या को पिछले 100 वर्षों की सबसे युगांतरकारी घटना बताते हुए दावा किया कि सुलेमानी के खौफ से खुद ईरान का शीर्ष नेतृत्व भी डरा हुआ था। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए खाड़ी देशों से अपील की है कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल अमेरिकी सेना की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों के लिए न होने दें।
होर्मुज जल संकट का वीडियो साक्ष्य और कतर हादसे के पीड़ितों की घर वापसी
सैन्य मोर्चे की बात करें तो अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों का एक प्रामाणिक वीडियो फुटेज जारी किया है। अमेरिका का दावा है कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज 'एम/वी एवर लवली' पर ईरानी ड्रोनों द्वारा हमला किया गया था, जिसमें भारी नुकसान हुआ है और यह हवाई कार्रवाई उसी का प्रत्यक्ष जवाब है। इन भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक अन्य दुखद घटनाक्रम में, कतर के रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र स्थित बरजान गैस आपूर्ति केंद्र में हुए भीषण विस्फोट में जान गंवाने वाले आठ और भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीरों को कानूनी प्रक्रियाओं के बाद सुरक्षित स्वदेश भेज दिया गया है। दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले कुल 13 लोगों में से अब तक 12 भारतीयों के शव भारत लाए जा चुके हैं, जबकि अस्पताल में भर्ती अन्य घायल नागरिकों को कतर सरकार के सहयोग से उचित चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।
