डॉलर से दूरी की ओर बढ़ता ब्रिक्स? मोदी, पुतिन और पेजेश्कियान ने दिया बड़ा संकेत

नई दिल्ली: ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने वैश्विक व्यापार, स्थानीय मुद्राओं के उपयोग और अमेरिकी नीतियों के खिलाफ एक साझा और कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हालिया चेतावनियों और टैरिफ के दबाव के बावजूद, ब्रिक्स देशों ने मौजूदा पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था के विकल्प को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी है।

बैठक के प्रमुख बिंदु और नेताओं के बयान

  • स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने प्रमुख विदेशी मुद्राओं (विशेषकर डॉलर) पर निर्भरता घटाने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार में राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्राओं के व्यापक इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने मुद्रा जोखिमों से निपटने के लिए एक स्वतंत्र भुगतान तंत्र और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को स्थानीय मुद्रा में ऋण देने का मुख्य इंजन बनाने की वकालत की।

  • समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार को निर्बाध बनाए रखने के लिए सुरक्षित समुद्री लेन और खुली आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का कट्टर समर्थक है, जो वर्तमान में पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

  • वैश्विक आर्थिक बदलाव: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रेखांकित किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था गहरे संरचनात्मक बदलावों के दौर से गुजर रही है, जहां बीसवीं सदी की पारंपरिक आर्थिक ताकतों (पश्चिमी देशों) की जगह विकास के नए इंजन ले रहे हैं।

  • अमेरिकी दबाव का विरोध: यह पूरा सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा ब्रिक्स देशों को दी गई उस चेतावनी की पृष्ठभूमि में हुआ, जिसमें उन्होंने डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। इसके बावजूद, नेताओं के तेवर साबित करते हैं कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं अब आर्थिक प्रतिबंधों और दबावों के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं।

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