काकोली घोष का बड़ा खुलासा: TMC के 20 सांसद NDA को भेज सकते हैं समर्थन

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर मंडरा रहा सियासी संकट अब और ज्यादा गहरा गया है। राज्य विधानसभा में 58 विधायकों की बड़ी बगावत झेल रही टीएमसी को अब देश की संसद में भी एक बहुत बड़ा झटका लगा है। पिछले कुछ दिनों से पार्टी के भीतर जारी टूट की अटकलों पर सोमवार को टीएमसी की वरिष्ठ लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने खुद मुहर लगा दी है। सांसद काकोली घोष ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि उनके साथ टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को अपना समर्थन देने का बड़ा फैसला किया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजा पत्र

सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि इस बड़े फैसले को लेकर टीएमसी के 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक आधिकारिक पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेज दिया गया है। इस पत्र के जरिए सभी सांसदों ने केंद्र की सत्ताधारी एनडीए सरकार के साथ मिलकर चलने और उन्हें बाहर से समर्थन देने की इच्छा जताई है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को अपनी इस नई राजनीतिक स्थिति से पूरी तरह अवगत करा दिया है।

मुख्य सचेतक होने का दावा, आपसी सहमति से फैसला

संसद के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 12 सांसद हैं। काकोली घोष ने दावा किया कि वह आज भी लोकसभा में टीएमसी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद पर बनी हुई हैं। उन्होंने साफ किया कि एनडीए को समर्थन देने का यह ऐतिहासिक कदम उन्होंने अकेले नहीं उठाया, बल्कि पार्टी के अन्य साथी सांसदों के साथ गहन विचार-विमर्श और आपसी सहमति के बाद ही यह बड़ा फैसला लिया गया है। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है, जिसने हाल के दिनों में कई वरिष्ठ नेताओं के खुले विद्रोह और ताबड़तोड़ इस्तीफों को देखा है।

जनता के फैसले का सम्मान करना जरूरी

अपने इस फैसले का बचाव करते हुए घोष दस्तीदार ने तर्क दिया कि उनके इस समूह ने खुद को एनडीए के साथ जोड़ने का निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि यह पश्चिम बंगाल की जनता के जनमत (जनादेश) को दर्शाता है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "हमने राज्य के चुनाव परिणामों में जनता द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। हमारा मानना है कि पश्चिम बंगाल के बेहतर भविष्य के लिए हमारे आगे के राजनीतिक मार्ग को अब एनडीए की नीतियों के हिसाब से ही आगे बढ़ना चाहिए।" हालांकि, बागी सांसदों के इन दावों और बगावत को लेकर टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व या ममता बनर्जी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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