शारदा नदी का जलस्तर बढ़ते ही लखीमपुर खीरी में बाढ़ का संकट, कई गांवों का संपर्क कटा

लखीमपुर खीरी। उत्तराखंड के बनबसा बैराज से एक लाख क्यूसेक से भी अधिक पानी छोड़े जाने के बाद उफान पर आई शारदा नदी ने लखीमपुर खीरी जिले के पलियाकलां तहसील क्षेत्र में तबाही मचाते हुए खतरे के निशान को पार कर लिया है और कई ग्रामीण इलाकों को अपनी आगोश में ले लिया है। निर्धारित 154.590 मीटर के मुकाबले मंगलवार की शाम चार बजे तक नदी का जलस्तर बढ़कर 154.690 मीटर तक पहुंच गया, जिसके चलते बाढ़ का विकराल पानी अब सड़कों और लहलहाते खेतों तक फैल गया है। मझौरा से इमलिया को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो जाने के कारण एक दर्जन से अधिक गांवों का सड़क संपर्क शेष दुनिया से पूरी तरह कट गया है।
दर्जनों गांवों का कटा संपर्क, पलिया के मेलाघाट और खैराना मार्ग पर बह रहा पानी
पलिया के मेलाघाट स्थित कब्रिस्तान के पास तथा कर्बला के नजदीक खैराना मार्ग के रपटा पुल के ऊपर से पानी काफी तेज रफ्तार से बह रहा है। मझौरा-इमलिया मुख्य मार्ग के बाधित होने के कारण इमलिया फॉर्म, जंगल नंबर सात, छंगा टांडा, जमुनहा, सूरजपुर, देशराज टांडा, ढकिया, बजेड़ा, कुंवरपुर, रेती पुरवा, सापुतारा, जसकरण सिंह, गिंधी पाल और मंदिर सिंह समेत तमाम गांवों के लोगों का संपर्क टूट चुका है। अब इन इलाकों के निवासियों को आवागमन के लिए भीरा के रास्ते लंबा चक्कर काटकर पलिया पहुंचना पड़ रहा है।
रेलवे लाइन के पास पहुंचा पानी, दौलतापुर में मगरमच्छों के आतंक से सहमे ग्रामीण
बोझवा ग्राम पंचायत के मटहिया गांव के पास बाढ़ का पानी अब रेलवे लाइन के बिल्कुल किनारे तक पहुंच चुका है, जबकि बरुआ कला, छोटा बरुआ और दौलतापुर गांवों में किसानों की खड़ी फसलें पूरी तरह डूब गई हैं। दूसरी ओर, दौलतापुर गांव में मगरमच्छों के खुलेआम आतंक ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। शारदा नदी के उफान के साथ पानी में बहकर मगरमच्छ अब सीधे गांवों के अंदर और मुख्य सड़कों तक पहुंच रहे हैं। बीती शाम एक भारी-भरकम मगरमच्छ को ट्रैक्टर के सामने से गुजरते हुए देखा गया, जबकि दूसरा पास ही आराम फरमाता नजर आया। ग्रामीणों के अनुसार ये मगरमच्छ अब तक तीन-चार पालतू कुत्तों को अपना शिकार बना चुके हैं। घटना की सूचना मिलने पर वन क्षेत्राधिकारी रमाकांत सक्सेना के निर्देशानुसार विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी।
डीएम और एडीएम ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा, बांटे जाएंगे राहत सामग्री के किट
निघासन क्षेत्र में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने मंगलवार को बाढ़ और नदी के कटान से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को राहत, बचाव और पुनर्वास से जुड़े सभी कार्य पूरी संवेदनशीलता और सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा जिला प्रशासन की पहली प्राथमिकता है और सरकार की तरफ से उन्हें हरसंभव मदद दी जाएगी। अपर जिलाधिकारी (एडीएम) ने निघासन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के साथ मिलकर प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाई। प्रशासन द्वारा बुधवार को पीड़ित परिवारों के बीच खाद्यान्न सामग्री की किटों का वितरण कराया जाएगा, ताकि किसी भी परिवार को रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
बझेड़ा तटबंध पर शुरू हुआ कटान रोकने का कार्य, बाढ़ चौकियां सक्रिय
बिजुआ क्षेत्र के बझेड़ा तटबंध पर नदी द्वारा कटान शुरू किए जाने की जानकारी सामने आने के तुरंत बाद बाढ़ खंड की तकनीकी टीम हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिया। कटान वाली जगह पर मिट्टी से भरे बोरे डालकर सुरक्षात्मक उपाय किए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बझेड़ा, करसौर, कोरियाना, रूरासुल्तानपुर, तनसुखपुरवा, बेलहासिकटिहा, दंबल-टांडा, रामनगर-कला, रेउतीपुरवा, गुजारा, असाढ़ी और रामेश्वरापुर जैसे गांव शारदा नदी के तट के करीब स्थित हैं। इनमें से बझेड़ा और गुजारा गांवों में हल्का कटान शुरू हो गया था। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राजस्व, सिंचाई, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमों को तैनात कर दिया गया है। साथ ही चार बाढ़ राहत केंद्र और तीन बाढ़ चौकियां पूरी तरह सक्रिय कर दी गई हैं। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता ने बताया कि बझेड़ा में तटबंध के छोर पर मामूली कटान को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया गया है और फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
धौरहरा क्षेत्र में डेढ़ करोड़ की कटानरोधी परियोजना का हिस्सा घाघरा नदी में समाया
धौरहरा इलाके के भदईपुरवा गांव के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से चार वर्ष पूर्व बनाई गई कटानरोधी परियोजना का लगभग 30 मीटर लंबा हिस्सा घाघरा नदी के तेज बहाव में समा गया है। इस घटना से भदईपुरवा गांव और आसपास की उपजाऊ कृषि भूमि पर कटाव का खतरा काफी बढ़ गया है। नदी के अत्यधिक तेज बहाव के कारण फिलहाल बचाव कार्यों में बाधा आ रही है, जिसे देखते हुए अब वायर क्रेट (लोहे के मजबूत जाल) में ईंट के रोड़े भरकर नदी के किनारे डाले जाने की योजना है ताकि कटान को रोका जा सके।
