घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के ताजा भाव, आज कितना देना होगा पैसा?

नई दिल्ली। व्यावसायिक रसोई गैस और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) के दामों में लगातार हो रहे इजाफे के बाद अब आम जनता के बीच LPG, CNG और PNG की कीमतों को लेकर चिंताएं गहरी होने लगी हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू उपयोग वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतें फिलहाल अपने पुराने स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं।

कमर्शियल सिलेंडर और छोटे गैस सिलेंडरों के दाम बढ़े

बीते 1 जून को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में एक बार फिर संशोधन किया गया। इस बदलाव के तहत देश की राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये और कोलकाता में 53.5 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही, दिल्ली में मिलने वाले 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर के दाम भी 11 रुपये बढ़ा दिए गए हैं, जिसके बाद अब इसकी कीमत 821.5 रुपये पर पहुंच गई है। हालांकि, घरेलू उपयोग वाले उपभोक्ताओं के लिए तुरंत कोई नया बदलाव नहीं किया गया है।

घरेलू रसोई गैस की कीमतें और तेल कंपनियों पर दबाव

आम उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत मार्च की शुरुआत से ही 913 रुपये पर टिकी हुई है। मार्च महीने में इसमें 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। ईंधन की सीमित उपलब्धता, वैश्विक बाजार में बढ़ती ऊर्जा लागत और तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण कीमतों में यह उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। सरकार का रुख है कि वह घरेलू आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने और ईंधन के भंडार को मजबूत करने के प्रयास कर रही है। टुकड़ों में की जा रही इस बढ़ोतरी का उद्देश्य आम जनता को महंगाई का एकमुश्त बड़ा झटका दिए बिना तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन दबाव को कम करना है, फिर भी इसका असर महंगाई पर पड़ना तय माना जा रहा है।

सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में उछाल और सप्लाई लागत का संकट

पिछले कुछ महीनों के दौरान 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई कॉस्ट (आपूर्ति लागत) में करीब दो-पेंटा (40%) की भारी वृद्धि हुई है, जिससे इसकी वास्तविक लागत लगभग 1200 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद आम उपभोक्ताओं को यह सिलेंडर अब भी 913 रुपये में ही मुहैया कराया जा रहा है। सप्लाई लागत में आए इस बड़े उछाल की मुख्य वजह प्रोपेन के सऊदी अनुबंध मूल्य (Saudi Contract Price) में आई भारी तेजी है।

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसके लिए सऊदी अरामको के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस को ही वैश्विक मानक माना जाता है। होर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते में सप्लाई बाधित होने के चलते अप्रैल महीने में इसके दामों में 38% का जोरदार उछाल आया था। हालांकि, सरकारी सूत्रों का दावा है कि वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी की दरें इस पूरे क्षेत्र में सबसे कम हैं। पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में सब्सिडी वाले और बिना सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों के दाम काफी कम बने हुए हैं, भले ही वहां सिलेंडरों के साइज में थोड़ा अंतर हो।

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