मध्य प्रदेश की भूमिका अहम: सिकल सेल उन्मूलन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बयान

खंडवा (ओंकारेश्वर)। विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर मध्य प्रदेश की पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में एक राज्य स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिकल सेल जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौती पर गहरी चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने इस बीमारी के समूल नाश (उन्मूलन) के लिए विभिन्न स्तरों पर युद्धस्तर पर काम कर रही मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की खुलकर सराहना की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने इस विशेष आयोजन को स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे गंभीर चुनौती से निपटने की दिशा में एक अत्यंत सार्थक कदम बताया। उन्होंने कहा कि विश्व सिकल सेल उन्मूलन अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश ने जो अभूतपूर्व और बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए वह राज्य सरकार की हृदय से आभारी हैं।

गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में मध्य प्रदेश की पहल सबसे मिसाल

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2023 में जब इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की गई थी, तब स्क्रीनिंग (जांच) को लेकर जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था, उसे मध्य प्रदेश सरकार ने समय सीमा से काफी पहले ही हासिल कर लिया है। यह राज्य के लिए कोई छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं है। चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पाई जाने वाली गंभीरतम चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों में यह अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी पहलों में से एक है।

इस ऐतिहासिक सफलता में मध्य प्रदेश का बहुत बड़ा और अनुकरणीय योगदान है, क्योंकि यहां अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और उन्हें जेनेटिक स्टेटस कार्ड भी सौंपे गए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से ही इस राष्ट्रीय उन्मूलन अभियान का शंखनाद किया था। सरकार का इसे पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प वास्तव में समाज के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाने की एक साझा और दूरदर्शी सोच का परिणाम है।

आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के अनूठे मेल की सराहना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश में पहली बार शुरू किए गए इस अनूठे मिशन के तहत आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता फैलाने, प्रीवेंटिव काउंसलिंग (निवारक परामर्श) करने और जेनेटिक कार्ड वितरित करने जैसे कदमों को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन करने के बाद कहा कि सिकल सेल के प्रामाणिक उपचार के लिए एलोपैथी (मेडिकल) के साथ-साथ गहन आयुर्वेदिक रिसर्च के बाद इलाज किया जाना एक बेहद उल्लेखनीय और सराहनीय कदम है।

उन्होंने बताया कि देश के 17 राज्यों में अब तक स्क्रीनिंग का काम बड़े पैमाने पर किया जा चुका है। विभिन्न शोध और अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि मध्य प्रदेश और ओडिशा में इस गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या काफी अधिक है। सबसे दुखद पहलू यह है कि सुदूर अंचलों में रहने वाले कई जनजातीय भाई-बहनों को इस बीमारी का नाम तक नहीं पता था, जबकि इस समाज में इसका प्रकोप सबसे ज्यादा है। यह पहली बार है जब जनजातीय कल्याण को ध्यान में रखकर इस तरह का डिजिटल मॉनिटरिंग कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसमें सभी राज्यों ने बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई है।

राज्यपाल मंगूभाई पटेल के प्रयासों को सराहा, विवाह पूर्व काउंसलिंग पर दिया जोर

प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल के प्रयासों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जिस आत्मीयता और संवेदनशीलता के साथ राज्यपाल इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, उससे पीड़ित परिवारों की आने वाली पीढ़ियों से यह रोग हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विवाह पूर्व काउंसलिंग करना, समय रहते रोग की सटीक पहचान करना और प्रबंधन की समुचित व्यवस्था बनाए रखना सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। इसके लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते, इसलिए माता-पिता को भी अपने बच्चों की इस गंभीरता का अंदाजा नहीं हो पाता, लेकिन अब जागरूक जनप्रतिनिधि, मंत्री, पंचायत सदस्य और अधिकारी इस दिशा में बेहतरीन काम कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने 'स्वस्थ नारी, सशक्त नारी' अभियान (17 नवंबर से 2 अक्टूबर 2025) का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत मध्य प्रदेश ने लाखों महिलाओं की स्क्रीनिंग कर एक नया कीर्तिमान रचा है। ग्रामीण व सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में मोबाइल टेस्ट वैन के जरिए जांच की जा रही है और सरकारी व निजी संस्थानों के सहयोग से 'सिकल सेल मित्र' तैयार किए गए हैं, जो हर मोर्चे पर मुस्तैदी से डटे हैं। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि मध्य प्रदेश इस बीमारी के खात्मे में देश के लिए एक नया प्रतिमान स्थापित करेगा।

इलाज के दायरे में होम्योपैथी को भी शामिल करने का सुझाव: राज्यपाल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्रियों, स्वास्थ्य मंत्री और विधायकों का आत्मीय अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि आज सिकल सेल दिवस केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश-विदेश में जन-जागरूकता, जन-भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन का एक विराट सामाजिक आंदोलन बन चुका है। जुलाई 2023 में मध्य प्रदेश के शहडोल से शुरू हुए इस अभियान को राज्य सरकार ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है, जिसके तहत अब तक 1.32 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है और वर्ष 2027 तक हम अपने अंतिम लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त कर लेंगे। पूरे देश में अब तक 7 करोड़ 21 लाख से ज्यादा लोगों की जांच की जा चुकी है, जो जनजातीय समाज के उत्थान के लिए केंद्र और राज्य सरकार का एक ऐतिहासिक कार्य है।

राज्यपाल ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि आयुर्वेद के साथ-साथ अब सिकल सेल के इलाज में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को भी शामिल किया जाना चाहिए, जिससे और भी बेहतर और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने समाज से अपील की कि यदि किसी युवक और युवती दोनों को ही यह जेनेटिक बीमारी है, तो वे आपस में विवाह न करें, क्योंकि ऐसे दंपत्ति की संतान में सिकल सेल रोग होने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोहराया संकल्प, पिछली सरकारों को घेरा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल को धन्यवाद देते हुए और आदि शंकराचार्य की पावन तपोभूमि, निमाड़ के धूनी वाले महाराज और क्रांतिवीर टंट्या मामा के क्षेत्र को नमन करते हुए राष्ट्रपति के समक्ष इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का दोबारा संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भावी पीढ़ी के भविष्य को बर्बाद करने वाली इस बीमारी को रोकने के लिए हम पूरी सादगी, शुचिता और संघर्ष के साथ आगे बढ़ रहे हैं और राष्ट्रपति के आशीर्वाद से इस लक्ष्य को हर हाल में पूरा करेंगे। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जब तक हमें पूर्ण सफलता नहीं मिल जाती, हम रुकने वाले नहीं हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली विपक्षी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले राज्य में केवल 5 मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे, लेकिन आज हमारी सरकार के प्रयासों से इनकी संख्या बढ़कर 32 हो गई है। हम स्वास्थ्य, शिक्षा और आयुर्वेद समेत हर क्षेत्र में चौतरफा विकास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश इस बीमारी से केवल अस्पतालों के भरोसे नहीं, बल्कि चार प्रमुख मोर्चों—व्यापक स्क्रीनिंग, सटीक रोग प्रबंधन, सिकल सेल कार्ड वितरण और सघन जन-जागरूकता के जरिए मजबूती से लड़ रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 5 दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा

उल्लेखनीय है कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वर्तमान में मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। दौरे के पहले दिन उन्होंने बैतूल में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जबकि दूसरे दिन वह खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में आयोजित इस राज्य स्तरीय विश्व सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुईं। राष्ट्रपति आगामी 22 जून को ग्वालियर के रास्ते दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी। ओंकारेश्वर पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रपति और राज्यपाल का पारंपरिक रूप से आत्मीय स्वागत किया, वहीं उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भगवान शिव की अलौकिक प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। इस गरिमामयी अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, जनजातीय कल्याण मंत्री और स्थानीय विधायक सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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