TMC को बड़ा झटका, सुष्मिता देव ने राज्यसभा सांसद पद से दिया इस्तीफा

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में हाल ही में मिली चुनावी करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही बगावत की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है। ममता बनर्जी खेमे को बुधवार को उस समय एक और करारा झटका लगा, जब पार्टी की तेजतर्रार राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। टीएमसी के भीतर जारी इस अभूतपूर्व संकट के बीच पिछले कुछ ही दिनों में राज्यसभा से यह दूसरा बड़ा इस्तीफा है, जिसने पार्टी के वजूद पर ही संकट खड़ा कर दिया है।

सुष्मिता देव का अचानक इस्तीफा

असम के सिलचर से पूर्व लोकसभा सांसद रहीं सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया और इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया। हालांकि, सुष्मिता देव ने अभी तक अपने इस फैसले के पीछे की सटीक वजहों को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे टीएमसी के भीतर चल रही ऐतिहासिक बगावत का सीधा हिस्सा माना जा रहा है।

गौरतलब है कि सुष्मिता देव साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। ममता बनर्जी ने उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों (विशेषकर असम और त्रिपुरा) में पार्टी का आधार मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया था और बाद में राज्यसभा भेजा था। उनका इस तरह पार्टी से किनारा करना ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका है।

सुखेंदु शेखर रॉय के बाद दूसरा बड़ा डैमेज

सुष्मिता देव का यह इस्तीफा इसलिए भी ज्यादा घातक माना जा रहा है क्योंकि कुछ ही दिन पहले तृणमूल के बेहद वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में लंबे समय तक पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने भी संसद की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। रॉय ने तो ममता बनर्जी को बकायदा एक कड़ा पत्र लिखकर पार्टी पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल होने के गंभीर आरोप मढ़े थे।

सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने विदाई पत्र में यहां तक लिख दिया था कि बंगाल की जनता अब टीएमसी के भ्रष्टाचार और अराजकता को पूरी तरह खारिज कर चुकी है और केंद्र की भाजपा सरकार ही अब बंगाल के वास्तविक विकास के लिए काम कर रही है। उनके इस बयान के बाद शुरू हुआ सियासी घमासान थमा भी नहीं था कि अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने आग में घी का काम कर दिया है।

पार्टी के भीतर मची भीषण रार: प्रमुख बिंदु

तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी हालात इस समय पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं:

  • बीजेपी के संपर्क में बागी: खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसद और दर्जनों विधायक लगातार भाजपा और एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में बने हुए हैं।

  • अलग गुट बनाने की तैयारी: दल-बदल कानून की अयोग्यता से बचने के लिए बागी नेताओं का यह धड़ा दो-तिहाई बहुमत के साथ संसद और विधानसभा में एक अलग गुट बनाने के बेहद करीब है।

  • लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप: बागी नेता सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर पार्टी के भीतर तानाशाही चलाने और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगा रहे हैं।

  • ममता खेमे का पलटवार: डैमेज कंट्रोल में जुटे टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद जैसे वफादार नेताओं ने बागियों पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें 'गद्दार' और भाजपा का 'एजेंट' करार दिया है।

ममता बनर्जी के सामने वजूद बचाने की सबसे बड़ी चुनौती

सालों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति में एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी के सामने अपने पूरे राजनीतिक करियर की यह सबसे कठिन परीक्षा है। उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी को दो-फाड़ होने और पूरी तरह बिखरने से बचाने की है। जहां एक तरफ अभिषेक बनर्जी दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से मिलकर किसी भी संभावित सांगठनिक समझौते या विलय की संभावनाएं तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को बंगाल की सत्ता से टीएमसी को पूरी तरह उखाड़ फेंकने के एक स्वर्णिम मौके के रूप में देख रही है। आने वाले कुछ दिन बंगाल और देश की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।

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