STF की बड़ी कार्रवाई: ₹1 लाख के इनामी मुस्तफिजुल का एनकाउंटर, लंबे समय से था फरार

गोरखपुर। सोमवार देर रात गोरखपुर में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान हुई एक मुठभेड़ में एक लाख रुपये का इनामी अपराधी मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू मारा गया। इस दौरान हुई फायरिंग में मुख्य आरक्षी महेंद्र सिंह भी घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार, घटना रात लगभग 11 बजे की है, जब रामनगर करजहा के पास टीम चेकिंग कर रही थी। आजमगढ़ निवासी मुस्तफिजुल ने भागने के दौरान पुलिस दल पर गोलियां चला दीं, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई और घटनास्थल से पुलिस ने एक पिस्टल, बाइक व भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं।

अपराधी का लंबा आपराधिक इतिहास

मुस्तफिजुल रहमान के खिलाफ कई राज्यों में हत्या और हत्या के प्रयास जैसे जघन्य अपराधों के मामले दर्ज थे। वर्ष 2024 में वह महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत से फरार होकर चर्चा में आया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसका आपराधिक सफर वर्ष 2003 में आजमगढ़ के मेहनगर थाने में दर्ज चोरी के मुकदमे से शुरू हुआ था। इसके बाद से वह लगातार गंभीर अपराधों में संलिप्त रहा और लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर था।

न्यायालय से कुर्की और इनाम की घोषणा

आरोपी के खिलाफ कानूनी शिकंजा समय के साथ कसता गया। वर्ष 2012 में हत्या और आपराधिक साजिश के मामले में कोर्ट के आदेश पर उसके खिलाफ धारा 82/83 के तहत उद्घोषणा और संपत्ति कुर्क करने की कार्यवाही की गई थी। अपराधों की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2021 में उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उसी वर्ष उस पर आईपीसी की धारा 174-ए और 506 के तहत भी नए मुकदमे पंजीकृत किए गए थे।

मुठभेड़ की घटना और बरामदगी

रामनगर करजहा से कुशीनगर लेन के समीप हुई इस मुठभेड़ में पुलिस ने साहस का परिचय देते हुए इनामी अपराधी को घेराबंदी कर पकड़ा। पुलिस की जवाबी फायरिंग में मुस्तफिजुल के पैर में गोली लगी थी, जिसके बाद उसे दबोच लिया गया। यद्यपि उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई, लेकिन अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस विभाग अब इस पूरे मामले और अपराधी के अन्य साथियों की संलिप्तता की जांच कर रहा है।

Leave a Reply