तालाबों की खुदाई की मिट्टी को लेकर मोहन सरकार के मंत्री आमने-सामने

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए। इस बैठक के दौरान पंचायतों के तालाबों से निकलने वाली काली मिट्टी के परिवहन को लेकर मंत्रियों के बीच तीखी बहस (नोकझोंक) देखने को मिळाली। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल का तर्क था कि मिट्टी ले जाने पर जल संसाधन विभाग आपत्ति जताता है, जिससे तालाबों को गहरा करने का काम रुक रहा है। वहीं, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि काली मिट्टी के नाम पर कई जगह पीली मिट्टी का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है, इसलिए विभाग कार्रवाई करता है। विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री ने इस मामले को सुलझाने के लिए तीनों विभागों की एक संयुक्त समिति बनाने के निर्देश दिए हैं, जो मिट्टी निकालने और परिवहन के नियम तय करेगी।
5 जुलाई तक तैयार होगा समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट आगामी 5 जुलाई तक तैयार कर लिया जाएगा, जिसे मानसून सत्र में विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून को लेकर अब तक 9 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं, जिनमें से करीब 90 फीसदी लोग इसके समर्थन में हैं। खास बात यह है कि अल्पसंख्यक समाज की अधिकांश महिलाओं ने भी इस कानून का खुलकर समर्थन किया है। यूसीसी पर जनता से सुझाव लेने की यह प्रक्रिया 30 जून तक पूरी कर ली जाएगी।
635 करोड़ की लागत से सुधरेगा स्कूलों का स्तर
प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटने (ड्रॉप आउट) की दर को कम करने के लिए कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। अगले तीन सालों में प्रदेश के 529 स्कूलों का उन्नयन (अपग्रेडेशन) किया जाएगा, जिसके तहत 315 माध्यमिक स्कूलों को हाई स्कूल और 214 हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूल बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 635 करोड़ 24 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि मंजूर की है। वर्तमान में राज्य में हायर सेकेंडरी स्तर पर एडमिशन की दर सिर्फ 55 प्रतिशत है, क्योंकि स्कूल काफी दूर होते हैं। सरकार का लक्ष्य 'विकसित मध्यप्रदेश@2047' के तहत साल 2029 तक शत-प्रतिशत (100%) एडमिशन दर हासिल करना है।
किसानों को अब एक साल के लिए मिलेगा बिना ब्याज का लोन
कैबिनेट ने किसानों को जीरो प्रतिशत (0%) ब्याज पर मिलने वाले अल्पकालीन फसल ऋण (लोन) की व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया है। अब तक किसानों को खरीफ और रबी सीजन के हिसाब से अलग-अलग लोन लेना और चुकाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें पूरे एक साल की अवधि के लिए लोन दिया जाएगा। इस योजना के तहत किसानों को करीब 25 हजार करोड़ रुपए का लोन बांटा जाता है, जिसका ब्याज सरकार खुद भरती है और इस वजह से सरकारी खजाने पर 880 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आता है। अब इस लोन की अवधि हर साल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक गिनी जाएगी।
गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा और कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले
बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि प्रदेश में 15 जुलाई से 30 जुलाई तक 'गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा' धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें सभी जिलों के प्रभारी मंत्री सांदीपनि स्कूलों के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कैबिनेट ने शाजापुर जिले के शुजालपुर में एक नया सरकारी विधि (लॉ) कॉलेज खोलने की मंजूरी दी है। साथ ही मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के लिए 1740 करोड़ रुपए, खाद्यान्न आपूर्ति के लिए 180 करोड़ रुपए और अन्य विकास योजनाओं को जारी रखने के लिए 5365 करोड़ रुपए की भारी राशि को मंजूरी दी गई है। जल गंगा संवर्धन अभियान में मध्य प्रदेश को देश में तीसरा स्थान मिलने पर डिंडोरी, खंडवा और शहडोल जिलों की सराहना की गई जो देश के टॉप-10 जिलों में शामिल रहे हैं।
