MSP धान खरीद पर AI की पैनी नजर, गुणवत्ता जांच में आएगी पारदर्शिता

गांधीनगर। गुजरात में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और हाईटेक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमण सोलंकी के मार्गदर्शन में गुजरात राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने खरीफ मार्केटिंग सीजन (केएमएस) 2025-26 के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एआई-बेस्ड ग्रेन एनालाइजर मशीनों से धान की गुणवत्ता जांचने की शुरुआत की है। इस तकनीकी पहल का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम कर किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाना और उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण अनाज पहुंचाना है।

चार जिलों के 10 केंद्रों पर एआई मशीनों की तैनाती

पायलट प्रोजेक्ट के तहत 'उपजाऊ एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड, गांधीनगर' द्वारा राज्य के चार प्रमुख जिलों—महीसागर, आणंद, अहमदाबाद और पंचमहाल के 10 खरीद केंद्रों पर 10 एआई-बेस्ड ग्रेन एनालाइजर लगाए गए हैं। इन 10 केंद्रों पर कुल 13,334 किसानों का पंजीकरण दर्ज किया गया है:

  • महीसागर जिला: लुणावाडा (2,278) और संतरामपुर (1,246)

  • आणंद जिला: खंभात (2,663) और बोरसद (884)

  • अहमदाबाद जिला: धोलका (1,000), बावला (909), विरमगाम (1,078) और साणंद (1,288)

  • पंचमहाल जिला: गोधरा (986) और शेहरा (1,002)

6,191 सैंपल्स की एआई जांच, धोलका में सर्वाधिक रिजेक्शन

एआई ग्रेन एनालाइजर मशीनों द्वारा अब तक कुल 6,191 धान के नमूनों का विश्लेषण किया गया है। जांच परिणामों के अनुसार:

  • ग्रेड-ए (GA): 3,379 नमूने (54.6%)

  • कॉमन (CM): 2,812 नमूने (45.4%)

  • रिजेक्टेड नमूने: 341 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे न उतरने के कारण खारिज किए गए।

आंकड़ों के मुताबिक, अहमदाबाद के धोलका केंद्र पर सबसे अधिक 24 प्रतिशत सैंपल रिजेक्ट हुए, जबकि विरमगाम केंद्र पर 0 प्रतिशत रिजेक्शन दर्ज किया गया। यह अत्याधुनिक एआई मशीन विदेशी तत्वों (फॉरेन मैटर), क्षतिग्रस्त/रंगहीन दानों, कच्चे या सिकुड़े हुए दानों, मिश्रण और नमी की सटीक जांच सेकंडों में कर देती है।

वर्तमान थर्ड पार्टी पद्धति बनाम एआई प्रणाली

एआई प्रणाली के सुचारू संचालन के लिए निरंतर विद्युत आपूर्ति और प्रति केंद्र एक तकनीकी ऑपरेटर की आवश्यकता होती है। वहीं निगम की मौजूदा व्यवस्था में थर्ड पार्टी सर्वेयर-ग्रेडर एजेंसी के दो तकनीकी विशेषज्ञ बिना बिजली के भी वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से सैंपलिंग और ग्रेडिंग का कार्य संपन्न करते हैं। निगम दोनों प्रणालियों की दक्षता और व्यावहारिक उपयोगिता का तुलनात्मक मूल्यांकन कर रहा है।

कड़े गुणवत्ता मानक और 100 प्रतिशत क्रॉस वेरिफिकेशन

निगम द्वारा गेहूं और चावल की खरीद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के मानदंडों तथा अन्य अनाजों की खरीद केंद्र सरकार के 'यूनिफॉर्म स्पेसिफिकेशन' के तहत की जाती है। अरहर दाल, चना, मूंगफली तेल, चीनी (एम-30) और डबल फोर्टिफाइड नमक की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से भी कड़े नियम लागू किए गए हैं:

  • दाल और चने से लदे ट्रकों को 'सिंगल यूज्ड वायर सील' से सुरक्षित कर गोदाम भेजा जाता है।

  • गोदाम प्रबंधक द्वारा लिए गए नमूनों का मुख्यालय की क्वालिटी कंट्रोल (क्यूसी) शाखा के माध्यम से एफआरएल में 100 प्रतिशत क्रॉस वेरिफिकेशन कराया जाता है।

  • नमूनों की जांच के लिए मानकीकृत पद्धतियों (IS:4333 और IS:2813:2015) का सख्ती से पालन होता है।

निगम का कहना है कि एआई तकनीक और बहुस्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लाभार्थियों तक स्वच्छ, शुद्ध और पौष्टिक खाद्यान्न पहुंचना सुनिश्चित हुआ है, जिससे सरकारी व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास और सुदृढ़ हो रहा है।

Leave a Reply