10 करोड़ की रंगदारी और गोलीबारी की जांच में नया एंगल, कारोबारी पर साजिश का शक

नई दिल्ली: प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और कुख्यात गैंगस्टरों के नाम पर 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी माँगने तथा पंजाब स्थित घर पर फायरिंग करवाने के सनसनीखेज मामले में अब जाँच की सुई खुद शिकायतकर्ता डिफेंस कारोबारी की तरफ ही घूमती नजर आ रही है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी गुरपिंदर सिंह और शमशेर सिंह की जमानत याचिका पर बहस के दौरान उनके वकील भानु मल्होत्रा ने अदालत में बड़ा दावा किया है कि कारोबारी ने केवल उच्च श्रेणी की पुलिस सुरक्षा हासिल करने के लिए यह पूरी फर्जी साजिश रची थी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में भी इस बात का जिक्र किया गया है, हालाँकि यह डिफेंस काउंसिल की दलील के संदर्भ में है। इस मामले में कोर्ट ने सोमवार को गुरपिंदर और मंगलवार को शमशेर को जमानत प्रदान कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, चाणक्यपुरी निवासी डिफेंस कारोबारी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी कि उन्हें वर्ष 2024 से लगातार विदेशी नंबरों से एक्सटॉर्शन कॉल और धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं। आरोप था कि 10 करोड़ रुपये न देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है, और इसी कड़ी में नवंबर 2025 में उनके अमृतसर स्थित पैतृक घर पर फायरिंग की घटना भी अंजाम दी गई थी। इस संबंध में चाणक्यपुरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी जाँच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के साथ-साथ पंजाब पुलिस द्वारा भी की जा रही है।

कर्मचारी और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी

क्राइम ब्रांच की तकनीकी तफ्तीश में यह खुलासा हुआ था कि ये धमकी भरे कॉल्स वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) के जरिए स्पेन और अन्य विदेशी ठिकानों से आ रहे थे। इसके बाद पुलिस ने गत 13 जून को अमृतसर और तरनतारन से कार्रवाई करते हुए कारोबारी के अपने कर्मचारी जसवंत, साथ ही गुरपिंदर उर्फ प्रिंस और शमशेर को गिरफ्तार कर लिया था।

क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में कारोबारी के कर्मचारी और पंजाब पुलिस के बर्खास्त एएसआई जसवंत को इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। आरोप है कि जसवंत ने ही शमशेर के जरिए गुरपिंदर को यह राजी किया था कि वह कारोबारी को डराने के लिए धमकी भरे वॉयस नोट्स और संदेश भेजे।

शिकायतकर्ता की भूमिका पर उठ रहे सवाल

मामले की जाँच कर रही पुलिस का यह भी कहना है कि शिकायतकर्ता कारोबारी खुद इस पूरी जाँच प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहा है और न ही वह वह मोबाइल फोन पुलिस को सौंप रहा है जिस पर धमकी भरे संदेश और वॉयस नोट्स रिसीव हुए थे।

अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील भानु मल्होत्रा ने जोर देकर कहा कि इस तथाकथित धमकी के आधार पर कारोबारी ने पंजाब और दिल्ली पुलिस से भारी-भरकम सुरक्षा ले रखी है, और उसने हाई-कैटेगरी सिक्योरिटी पाने के उद्देश्य से अपने ही कर्मचारी के साथ मिलकर यह झूठा जाल बुना था। फिलहाल अदालत में मामले के कानूनी पहलुओं पर सुनवाई जारी है और शिकायतकर्ता की संदिग्ध भूमिका की भी गहनता से जाँच की जा रही है।

Leave a Reply