पंचायत राजनीति का नया समीकरण, आंकड़ों ने बदली यूपी के वोट बैंक की तस्वीर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायत वोटर लिस्ट (2025-26) के नए आंकड़ों ने ग्रामीण राजनीति की एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की है। इन आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के ग्रामीण वोट बैंक का संतुलन अब तेजी से बदल रहा है। जहाँ एक तरफ पूर्वांचल और तराई के इलाकों में पंचायत वोटरों की तादाद में भारी इजाफा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पलायन के चलते सूबे के 11 जिलों में पंचायत मतदाता कम हो गए हैं। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 5 बड़े जिले शामिल हैं।
गाजीपुर और मैनपुरी में सबसे बड़ा उलटफेर, तेजी से घटे ग्रामीण वोटर
वोटर लिस्ट के आंकड़ों में सबसे हैरान करने वाली गिरावट गाजीपुर और मैनपुरी में देखी गई है। गाजीपुर में इस बार पंचायत मतदाताओं की संख्या में 94,757 की कमी आई है, जबकि मैनपुरी में यह आंकड़ा 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 तक कम हुआ है। इसके अलावा वाराणसी में 41,397, एटा में 23,429, आगरा में 23,294, गाजियाबाद में 15,637 और गौतमबुद्धनगर में 12,431 ग्रामीण वोटर कम हुए हैं। जानकारों का मानना है कि जिन इलाकों में शहरों का दायरा बढ़ रहा है या जहाँ से लोग काम की तलाश में बाहर जा रहे हैं, वहाँ यह गिरावट साफ दिख रही है।
एनसीआर के जिलों में सबसे कम पंचायत वोटर, जौनपुर-प्रयागराज सबसे आगे
औद्योगिकीकरण और शहरी पहचान के कारण दिल्ली से सटे एनसीआर के जिले अब पंचायत व्यवस्था से दूर होते जा रहे हैं। गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में पंचायत मतदाताओं की संख्या महज 2.09 लाख रह गई है, जो पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे कम है। गाजियाबाद में भी यह संख्या केवल 4.56 लाख है।
इसके विपरीत, पूर्वांचल के जिलों में ग्रामीण राजनीति का दबदबा अब भी कायम है। जौनपुर में सबसे ज्यादा 36.97 लाख पंचायत वोटर हैं। इसके बाद आजमगढ़ में 35.76 लाख, प्रयागराज में 34.95 लाख और गोरखपुर में 29.63 लाख मतदाता हैं, जो यह साबित करता है कि पूर्वांचल आज भी ग्रामीण सियासत का मुख्य केंद्र है।
बलिया और खीरी में नए वोटरों की बहार
सकारात्मक पक्ष की बात करें तो पूर्वांचल और नेपाल सीमा से लगे तराई के जिलों में ग्रामीण मतदाताओं की नई खेप तैयार हुई है। बलिया जिला इस मामले में सबसे आगे रहा, जहाँ रिकॉर्ड 1,60,376 नए पंचायत वोटर जुड़े हैं। इसके अलावा लखीमपुर खीरी में 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162, कुशीनगर में 1,20,011 और प्रयागराज में 92,460 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। इन बदलावों से साफ है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की पंचायत राजनीति का झुकाव पूर्वांचल की तरफ और मजबूत होने वाला है।
