मानवता की कीमत जान से चुकाई, बछड़े को बचाने कुएं में उतरे चार युवकों की मौत

झज्जरहरियाणा के झज्जर जिले के एक ग्रामीण इलाके में एक बहुत बड़ा और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। गांव मुनीमपुर में बने करीब 150 साल पुराने और पिछले 50 वर्षों से बंद पड़े एक सूखे कुएं में गिरे एक बछड़े को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास में चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण हादसे में जान गंवाने वालों में तीन स्थानीय ग्रामीण और एक उत्तर प्रदेश का प्रवासी श्रमिक शामिल है। इस मर्मस्पर्शी घटना के बाद से पूरे गांव में गहरा सदमा और तनाव का माहौल बना हुआ है।

150 साल पुराने कुएं में बछड़ा गिरने से शुरू हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव मुनीमपुर के बीचों-बीच दशकों पुराना एक कुआं स्थित है, जो पिछले 50 वर्षों से पूरी तरह से बंद और सूखा पड़ा था। रविवार की देर रात अचानक एक बछड़ा पैर फिसलने के कारण इस गहरे कुएं में जा गिरा। बछड़े की दयनीय आवाज सुनकर कुछ ग्रामीण उसे बचाने के लिए कुएं के पास पहुंचे।

बचाव कार्य के दौरान एक-एक कर कुएं में उतरे लोग, जहरीली गैस बनी मौत की वजह

कुएं में गिरे बछड़े को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सबसे पहले कुछ ग्रामीण नीचे उतरे, लेकिन अंदर भारी मात्रा में जहरीली गैस और ऑक्सीजन की भारी कमी होने के कारण वे अछूते नहीं रह सके। बछड़े को और उसके बाद एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में एक के बाद एक चार लोग उस गहरे कुएं में उतर गए और दम घुटने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इस प्रकार एक बेजुबान जानवर सहित कुल पांच जिंदगियां इस हादसे में काल के गाल में समा गईं।

मृतकों की हुई शिनाख्त, गांव में पसरा मातम

इस हृदयविदारक दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान गांव मुनीमपुर निवासी दलबीर (पुत्र फूल सिंह), मोनू (पुत्र राजबीर), नरेंद्र (पुत्र सत्यवान) और उत्तर प्रदेश के मूल निवासी श्रमिक रामू (पुत्र रामदुलारे) के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। प्रशासन ने भारी मशक्कत के बाद सभी के शवों को कुएं से बाहर निकाला और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। इस एक साथ चार मौतों से पूरे गांव में कोहराम मचा हुआ है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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