अब री-एंट्री से पहले लेनी होगी अनुमति, IN-SPACe की नई गाइडलाइन लागू

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र यानी आईएन-स्पेस ने अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक नए और कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए अंतरिक्ष मलबे या ऑब्जेक्ट्स की री-एंट्री के संबंध में सख्त नियम तय किए गए हैं।
निजी कंपनियों के लिए जोखिम सीमा तय और अनुमति अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार अब निजी अंतरिक्ष कंपनियों को किसी भी स्पेस ऑब्जेक्ट की री-एंट्री के दौरान जान-माल या संपत्ति को नुकसान पहुँचने के जोखिम को 10,000 में से 1 से भी कम रखना होगा और किसी भी क्षेत्र में वापसी की योजना बनाने से पहले आईएन-स्पेस की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
अंतरिक्ष नीति-2023 के तहत जारी की गईं नई गाइडलाइंस
भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के अंतर्गत स्पेस ऑब्जेक्ट्स की योजनाबद्ध वापसी से जुड़ी इन व्यापक गाइडलाइंस को हाल ही में आधिकारिक तौर पर जारी किया गया है, जिसके दायरे में न केवल भारतीय बल्कि भारत के भीतर री-एंट्री की इच्छा रखने वाली गैर-भारतीय संस्थाएं भी शामिल हैं।
बीमा कवरेज और छह महीने पहले आवेदन का प्रावधान
दिशानिर्देशों में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कंपनियां अपनी पूरी जिम्मेदारी और जोखिम पर ही यह कार्य करेंगी तथा वे भारत सरकार पर कोई देनदारी नहीं डाल सकतीं, जिसके लिए पर्याप्त थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस लेना जरूरी होगा और बिना पूर्व सूचना के पुनः प्रवेश की स्थिति में छह महीने पहले आवेदन करना होगा।
