टीबी खत्म करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में तेज कार्रवाई का संकल्प, डब्ल्यूएचओ ने बनाई नई रणनीति

नई दिल्ली । विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों ने तपेदिक यानी टीबी को खत्म करने के लिए अधिक मजबूत और एकीकृत कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है। 9 सितंबर 2026 को तिमोर-लेस्ते में हुई डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति की बैठक में टीबी की जल्द पहचान, बेहतर इलाज, रोकथाम और मरीजों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने पर जोर दिया गया।
दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी का घर है, लेकिन वर्ष 2024 में दुनिया के नए टीबी मामलों में लगभग 34 प्रतिशत मामले इसी क्षेत्र से सामने आए। अनुमान के मुताबिक, इस दौरान क्षेत्र में करीब 36.8 लाख नए टीबी मामले और 4.33 लाख मौतें हुईं। वहीं लगभग 1.5 लाख लोग बहु-दवा प्रतिरोधी और रिफैम्पिसिन-प्रतिरोधी टीबी से प्रभावित हुए।
बैठक में देशों ने नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए टीबी की जल्द पहचान, व्यवस्थित जांच और ज्यादा जोखिम वाले तथा वंचित समूहों में सक्रिय रूप से मरीजों की तलाश बढ़ाने पर सहमति जताई। डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाई गई तेज जांच तकनीकों, आणविक जांच और जरूरत के अनुसार डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
टीबी से बचाव के लिए संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों और अन्य जोखिम वाले लोगों को निवारक उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। साथ ही कुपोषण, मधुमेह और तंबाकू सेवन जैसे टीबी के प्रमुख जोखिम कारकों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र ने 2015 के बाद टीबी के खिलाफ प्रगति की है। उपचार कवरेज 85 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, टीबी के नए मामलों की दर में 16 प्रतिशत और मौतों में 23 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, 2030 तक टीबी मामलों में 80 प्रतिशत और मौतों में 90 प्रतिशत कमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मौजूदा प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।
टीबी का आर्थिक बोझ भी बड़ी चुनौती है। क्षेत्र में टीबी से प्रभावित करीब 44 प्रतिशत परिवारों को विनाशकारी स्वास्थ्य खर्च का सामना करना पड़ता है। दवा-प्रतिरोधी टीबी से प्रभावित परिवारों में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से अधिक है। वर्ष 2024 में क्षेत्रीय टीबी कार्यक्रमों के लिए करीब 90 करोड़ अमेरिकी डॉलर उपलब्ध थे, जबकि अनुमानित जरूरत लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर थी।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा है कि 2028 से टीबी का टीका उपलब्ध होने पर मौजूदा उपायों के साथ इसका इस्तेमाल वर्ष 2030 तक करीब 14.5 लाख नए टीबी मामलों और 3 लाख मौतों को रोकने में मदद कर सकता है।
सदस्य देशों ने टीबी सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने, घरेलू वित्त पोषण बढ़ाने, सीमा पार मरीजों की देखभाल और दक्षिण-दक्षिण सहयोग मजबूत करने पर भी सहमति जताई। लक्ष्य स्पष्ट है—2030 तक टीबी को खत्म करने की दिशा में क्षेत्रीय कार्रवाई को तेज करना और किसी भी मरीज को इलाज से वंचित न रहने देना।

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