बंगाल में सियासी हलचल तेज: ‘बुलडोजर का डर’ और यूसुफ पठान की चर्चा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच अब बहरामपुर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पूर्व स्टार क्रिकेटर यूसुफ पठान को लेकर एक नया और सनसनीखेज विवाद खड़ा हो गया है। टीएमसी के बागी खेमे में शामिल होने के बाद पार्टी की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा और श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के बयानों ने देश के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यूसुफ पठान पर 'डर' के मारे पाला बदलने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

संसद का 'गुप्त' वाकया: गुजरात में बुलडोजर कार्रवाई का डर?

इस पूरे विवाद की शुरुआत श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। मेहदी ने संसद के एक पुराने वाकये का जिक्र करते हुए 'X' (ट्विटर) पर लिखा कि सदन के भीतर एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान यूसुफ पठान अचानक पीछे हट गए थे। मेहदी के मुताबिक:

"संसद में एक वरिष्ठ मुस्लिम सांसद ने यूसुफ पठान के पास जाकर उन्हें भाजपा के खिलाफ ज्यादा मुखर न होने की हिदायत दी थी। जब यूसुफ से इसका कारण पूछा गया, तो उन्होंने बेहद डरे हुए लहजे में बताया था कि उन्हें गुजरात में उनके ठिकानों पर संभावित 'बुलडोजर कार्रवाई' की चेतावनी दी गई है।"

महुआ मोइत्रा का बड़ा दावा: ओवैसी ने दी थी यूसुफ को चेतावनी

रूहुल्लाह मेहदी की इस पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए कृष्णानगर से टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एक और बड़ा धमाका कर दिया। महुआ ने उस वरिष्ठ मुस्लिम सांसद का नाम उजागर करते हुए सीधे तौर पर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर आरोप मढ़ा। महुआ ने दावा किया:

"मुझे वह वाकया अच्छी तरह याद है। असदुद्दीन ओवैसी ने ही यूसुफ पठान को वह डराने वाली सलाह दी थी। उस वक्त मैंने खुद यूसुफ को ढांढस बंधाया था कि पार्टी (TMC) और ममता बनर्जी उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी हैं, उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन आज यूसुफ ने जिस तरह बगावत की है, वह दिखाता है कि उन्होंने ममता दीदी और बंगाल की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है।"

वडोदरा का जमीन विवाद बना बगावत की वजह?

राजनीतिक हलकों में इस 'बुलडोजर डर' के पीछे गुजरात के वडोदरा में यूसुफ पठान से जुड़े एक पुराने जमीन विवाद को मुख्य वजह माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि गुजरात (भाजपा शासित राज्य) में अपनी अकूत संपत्ति और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए ही यूसुफ ने टीएमसी से बगावत कर बागी गुट का दामन थामा है। हालांकि, इस गंभीर आरोप पर अभी तक न तो यूसुफ पठान और न ही असदुद्दीन ओवैसी की तरफ से कोई आधिकारिक सफाई सामने आई है।

कोर्ट की दहलीज पर टीएमसी की जंग: अभिषेक बनर्जी बनाम सुदीप बंदोपाध्याय

इस बीच, टीएमसी के 22 बागी सांसदों के 'राष्ट्रवादी सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय के फैसले के बाद दिल्ली से लेकर कोलकाता तक कानूनी जंग शुरू हो गई है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि इस बागी गुट को कतई मान्यता न दी जाए और इन सभी को अयोग्य घोषित किया जाए।

दूसरी तरफ, बागी गुट के मुखिया सुदीप बंदोपाध्याय ने पलटवार करते हुए साफ कर दिया है कि उनके पास दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत है, इसलिए वे कानूनी रूप से पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि लोकसभा अध्यक्ष ने उनके विलय को मंजूरी नहीं दी, तो वे सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और 'असली टीएमसी' के सिंबल पर अपना दावा ठोकेंगे।

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