सूखे के संकट से निपटने की तैयारी, मध्य प्रदेश में बनेंगे चारा बैंक

इंदौर। अलनीनो के असर से इंसानों के साथ-साथ पशुओं के आहार पर भी संकट गहराने की आशंका बन गई है। सूखे और अत्यधिक गर्मी के कारण हरे चारे की होने वाली कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने पशुपालकों को साइलेज (चारा बैंक) तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आजीविका प्रभावित न हो।

क्या है साइलेज तकनीक

साइलेज हरे चारे को वायु-रहित वातावरण में किण्वन (फरमेंटैशन) प्रक्रिया के जरिए लंबे समय तक सुरक्षित रखने का एक तरीका है। इसके लिए मक्का, ज्वार, बाजरा और जई जैसी चारा फसलों को सही अवस्था में काटकर छोटे टुकड़ों में बांटा जाता है। इसके बाद इसे बंकर, गड्ढों या विशेष प्लास्टिक बैगों में भरकर अच्छी तरह दबाया जाता है ताकि अंदर की हवा पूरी तरह निकल जाए।

प्रयोग और भंडारण की विधि

चारे को सुरक्षित रखने के लिए इसमें आवश्यकतानुसार गुड़, नमक और जैविक कल्चर मिलाकर पॉलीथिन से पूरी तरह एयरटाइट बंद किया जाता है। साइलेज को इस्तेमाल करने से पहले कम से कम 45 दिनों तक वायुरहित अवस्था में रखना जरूरी होता है। सही तरीके से तैयार और भंडारित किया गया साइलेज लगभग दो साल तक खराब नहीं होता है।

आवश्यक उपकरण और वित्तीय सहायता

साइलेज बनाने के लिए साइलेज बंकर, एचडीपीई बैग, प्लास्टिक शीट, पावर कुट्टी मशीन और कटाई-पैकिंग मशीनों की जरूरत होती है। छोटे किसान 50 से 1000 किलो क्षमता वाले बैग इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि बड़े स्तर पर 3 से 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले बंकर बनाए जा सकते हैं। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना के तहत साइलेज इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।

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