स्विगी के शेयरों पर दबाव, कंपनी के बड़े ऐलान के बाद निवेशकों ने बेचे स्टॉक

बेंगलुरु: प्रमुख ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनी स्विगी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में कमजोरी के साथ खुलने के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ने से शेयर में करीब 7 फीसदी तक की बड़ी गिरावट आई, जिससे यह अपने अब तक के सबसे निचले स्तर की ओर खिसक गया। इस गिरावट के पीछे कंपनी द्वारा किया गया एक नया रणनीतिक ऐलान है।
विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49.5 प्रतिशत तय करने की तैयारी
कंपनी ने शेयर बाजारों को सूचित किया कि उसके बोर्ड ने विदेशी हिस्सेदारी की सीमा को 49.5 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जबकि वर्तमान में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति है। इस प्रस्ताव को 18 अगस्त को आयोजित होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग में शेयरधारकों की स्वीकृति के लिए विशेष प्रस्ताव के रूप में पेश किया जाएगा।
वैश्विक बाजार सूचकांकों से बाहर होने का गहराया खतरा
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीमा के तय होने के बाद कंपनी में अतिरिक्त विदेशी पूंजी के लिए जगह नहीं बचेगी। इसके चलते स्विगी के वैश्विक शेयर सूचकांकों से बाहर होने की संभावना बन गई है, जिससे विदेशी निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर शेयर बेचे जा सकते हैं और स्टॉक की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स से हटने पर करोड़ों शेयरों की बिकवाली संभव
यदि स्विगी MSCI और FTSE जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स से बाहर होती है, तो बड़े फंडों द्वारा लगभग 34 करोड़ डॉलर मूल्य के 12.5 करोड़ से अधिक शेयरों की बिकवाली की जा सकती है। इसके साथ ही FTSE इंडेक्स से हटने पर भी करीब 4.6 करोड़ शेयर बाजार में बेचे जाने का अनुमान जताया जा रहा है।
क्विक कॉमर्स में नए मॉडल से लंबे समय में मार्जिन सुधार की उम्मीद
हालांकि, इस प्रस्ताव का उद्देश्य अपने क्विक कॉमर्स कारोबार को 'फर्स्ट पार्टी इनवेंट्री मॉडल' पर संचालित करना है, जिसका उपयोग ब्लिंकिट और ज़ेप्टो जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां करती हैं। इससे आने वाले समय में कंपनी के परिचालन मार्जिन में सुधार की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल बिकवाली के दबाव के बीच शेयर 245.58 रुपये के स्तर पर आ गया है और इस साल अब तक इसमें 37 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
