ऊर्जा संरक्षण पर सवाल, निगम क्षेत्र में 24 घंटे रोशनी से बढ़ रहा बिजली खर्च

जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर के बिजली मुख्यालय शक्तिनगर और उसके आसपास के रिहाइशी इलाकों में इन दिनों नगर निगम की बड़ी लापरवाही के चलते सरकारी बिजली की सरेआम बर्बादी हो रही है। इस वीआईपी क्षेत्र में लगीं दर्जनों स्ट्रीट लाइटें रात के साथ-साथ कड़कड़ाती धूप में भी चौबीसों घंटे रोशन रह रही हैं। पूरे इलाके की सड़कों और गलियों में दिन के वक्त जलती इन बत्तियों को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र के नागरिकों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह आंखें मूंदकर खामोश बैठे हुए हैं।
एक हफ्ते से लगातार जल रही हैं बत्तियां
यह पूरा मामला शक्तिनगर चौक के समीप स्थित कोल माइंस ऑफिस के ठीक पीछे वाले हिस्से का है, जहाँ लगी स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि ये लाइटें पिछले सात दिनों से बिना रुके लगातार जल रही हैं। बीच में केवल कुछ ही घंटों के लिए इन्हें कभी बंद देखा गया था, अन्यथा दिन हो या रात, ये बत्तियां हमेशा चालू रहती हैं। बिजली विभाग के नाक के नीचे हो रही इस बर्बादी को रोकने के लिए कोई भी सुध लेने वाला नहीं है।
दोपहर तक भी बंद करने नहीं आता कोई कर्मचारी
इलाके के जागरूक नागरिकों— चंद्र किशोर, अजय, रोशन और संजय ने बताया कि पहले इन लाइटों को बंद करने का कोई निश्चित समय तय नहीं था। अमूमन सुबह होने के बाद या दोपहर ढलने तक इन्हें मैन्युअली बंद कर दिया जाता था। लेकिन मौजूदा प्रशासनिक अव्यवस्था का आलम यह है कि अब इन खंभों पर लगी लाइटों के स्विच को ऑफ करने के लिए हफ़्तों से कोई भी लाइनमैन या निगम का अमला मौके पर नहीं पहुंचा है।
रहवासियों ने मांग की है कि ऊर्जा की इस अनावश्यक बर्बादी को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से यहां ऑटोमैटिक टाइमर स्विच लगाए जाएं या फिर किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि जनता के टैक्स के पैसों और बिजली की इस तरह बर्बादी न हो।
